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एटक बीड़ी श्रमिक संगठन करेगा आंदोलन

नेहरू कॉलोनी की नासिन बाई.. इन दिनों खासी परेशान है। उसकी परेशानी का कारण है तंबाकू निषेध का नया कानून। जिसके तहत बीड़ी-सिगरेट की पैकिंग पर तंबाकू विरोध तस्वीर छापना अनिवार्य है। बीड़ी व्यापारियों को लगता है कि नए कानून से उन्हें धंधा समेटना पड़ सकता है। वे पहले से तंगहाली में दिन गुजार रहे हैं। नये कानून से उनकी छोटी उम्मीद भी धुंधलाने लगी है।


नासिन बाई महापात्रा उड़ीसा की रहने वाली है। उसे बीड़ी बनाने के अलावा अन्य कोई काम नहीं आता। वह अपनी विधवा बहू निशा और पोते के साथ यहां पिछले छह साल से यहीं बीड़ी बनाने का काम करती है। सास-बहू दोनों शाम तक एक सौ दस रुपये का तक का काम कर लेती हैं। शहर की स्लम बस्तियों नेहरू कालोनी, डबुआ कालोनी, नंगला रोड, राजीव कालोनी, संजय कालोनी आदि इलाकों में सैंकड़ों बीड़ी अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दरअसल, दिल्ली और शहर के कुछ व्यापारी बीड़ी पत्ता और तंबाकू उड़ीसा, झरंखड़ व मध्यप्रदेश जसे इलाकों से लाकर यहां बीड़ी बनवाते हैं। इसकी पैकिंग करवाकर शहर की स्लम बस्तियों की दुकानों पर बेचा जता है। बीड़ी श्रमिक संघ को लगता है कि बीड़ी के पैकेट पर इसकी रोकथाम वाले फोटो छापने से ग्रहकों की संख्या कम हो जाएगी। पहले से ही बीड़ी पीने वालों की संख्या कम हो गई है। इससे और बुरा हाल होगा।


एटक इस मसले को लेकर आंदोलन के मूड में है। संगठन के प्रदेश सचिव व जिलाध्यक्ष बेचूगिरी का कहना है कि बीड़ी कामगारों का पहले पुनर्वास किया जाना चाहिए। बाद में ऐसे कानून लागू किए जाएं। एटक कानून के विरोध में नहीं, बल्कि इसके लागू तरीके पर विरोध कर रही है। यह बीड़ी मजदूरों के हित में नहीं है। हालांकि फरीदाबाद में बीड़ी कारोबारी और मजदूरों की संख्या ज्यादा नहीं है। फिर यहां सैंकड़ों परिवार नए कानून की चपेट में आ गए हैं। मध्यप्रदेश, आंध्रप्रेदश, उड़ीसा, झरखंड़ जैसे प्रदेशों में यह आंदोलन बड़ा रुप ले सकता है।
-अशोक कुमार

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  • Web Title:एटक बीड़ी श्रमिक संगठन करेगा आंदोलन