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विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेष

वातावरण में अगर इसी तरह से जहर घुलता रहा तो लोगों की सांसों पर ब्रेक लग जाएगा। फैक्टरियों, वाहनों, कमेलों की भट्टियों के कारण फैलने वाले प्रदूषण ने पुराने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सर्वे में औद्योगिक क्षेत्रों के प्रदूषण में बढ़ोतरी पाई गई। पानी से लेकर हवा में प्रदूषक तत्वों का स्तर अति घातक स्थिति में मिला।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने जब मई 2008 में सर्वे कराया था तो साहिबाबाद व बुलंदशहर इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में हवा में आरएसपीएम की मात्रा करीब 236 थी, लेकिन जनवरी 2009 के सर्वे में यह बढ़कर 243 हो गई। इसके अगले महीने में यह मात्रा बढ़कर 258 हो गई। यह स्थिति एसपीएम, एचओएक्स व एसओ-2 सभी तरह के प्रदूषण की रही। हवा में घुल रहे जहर की बढ़ोतरी होने से लोगों को सांस लिए साफ हवा नहीं मिल रही है। वहीं शहर के नालों में भी जहरीले पदार्थ बह रहे हैं, जो जमीन में जाकर भूगर्भ जल के रूप में लोगों के शरीर में पहुंच रहे हैं। शहर की हिंडन नदी तो प्रदूषण के कारण पहले ही मृतप्राय हो चुकी है।
एक साल में प्रदूषण का स्तर

माह                        क्षेत्र                 आरएसपीएम     एसपीएम     एसओ-2      एनओएक्स
मई 2008       साहिबाबाद                 236                       457             21                      12
                        बु.शहर रोड               191                       486              18                      15

फरवरी 2009 -                                 258                       507              33                      28
                      -                                  252                       483             30                       26

प्रदूषण का मानक स्तर
पैरामीटर  स्टैंडर्ड
एसओ-2  120 यूजी/एम3
एनओएक्स 120 यूजी/एम3
एसपीएम   500 यूजी/एम3
आरएसपीएम  150 यूजी/एम3

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान का कहना है कि सॉलिड फ्यूल से चलने वाली औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। अब सॉलिड फ्यूल से चलने वाली नई फैक्ट्रियों के निर्माण की परमिशन नहीं दी जा रही है। सीएनजी या लिक्विड फ्यूल से चलने वाली फैक्ट्रियों के निर्माण को मंजूरी दी जा रही है। सॉलिड फ्यूल वाली इकाइयों को भी अपने यहां लिक्विड फ्यूल इस्तेमाल करने को कहा जा रहा है। फैक्ट्रियों में गंदे पानी को नालों में बहाने से पहले ट्रीटमेंट प्लांट से गुजारने के निर्देश दिए गए हैं।


प्रदूषणकारी 117 फैक्टरी बंद कराई
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी टीयू खान ने बताया कि दिल्ली से बाहर होने वाली 117 प्रदूषणकारी फैक्ट्रियों को बिना अनुमति चलने पर बंद कराया गया है। यह फैक्ट्रियों साहिबाबाद, रूपनगर, श्यामपार्क लोनी, राजेंद्र नगर में चल रही थी। इन फैक्ट्रियों को जल अधिनियम के अंतर्गत प्रदूषण फैलाने का दोषी पाया गया। इससे पहले आवासीय क्षेत्र में चल रही 80 फैक्ट्रियों को बंद कराया जा चुका है। अब फिर से प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चलाया जएगा।

प्रदूषण फैला रहा गंभीर बीमारियां
शांति गोपाल हॉस्पिटल इंदिरापुरम के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल तोमर ने बताया कि जहरीले रसायनों से पैदा हुई बीमारियों से लोगों की आयु घट रही है। पानी और हवा के जहरीले तत्व मानव शरीर में पहुंचकर कैंसर, हृदय रोग, गुर्दा रोग, अस्थमा, टीबी, हाईपर टेंशन जसी खतरनाक बीमारियां पैदा कर रहे हैं। पानी में जहरीले पदार्थ लैड, कैडमियम, कार्बन जैसे घातक तत्वों से लोगों को चर्म रोग हो रहा है। लोनी क्षेत्र के लुतफुल्लापुर नवादा गांव में जहरीले पानी से तो महिलाएं बांझपन की भी शिकार हो गई है। यही स्थिति हापुड़ में भी पैदा हो गई है। वहां के एक गांव के लड़कों के साथ दूसरे गांव के लड़की वाले शादी करने से कतरा रहे हैं।
कुलदीप त्यागी

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