class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आंध्र प्रदेश : इस भेदभाव की वजह क्या है

एक नहीं लगातार दो बार इस राज्य ने लोकसभा में पार्टी को सबसे ज्यादा सांसद दिए। उसी की बदौलत पार्टी सरकार बनाने की हालत में आई। लेकिन जब सरकार बनाने का मौका आया तो इस राज्य को मंत्रिमंडल में कोई सम्मानजनक स्थान ही नहीं मिला।

लेकिन गंठजोड़ की राजनीति के इस युग में यह कोई हैरत वाली बात नहीं है। और इससे भी दिलचस्प बात यह है कि इस सब के बावजूद राज्य में किसी ने भी इस पर चूं तक नहीं की। आंध्र प्रदेश में यही हुआ है- इस प्रदेश ने
कांग्रेस की तश्तरी में 33 सीटें परोसीं और मंत्रिमंडल में इसे सिर्फ पांच जगहें ही मिलीं।

इसमें भी तो सिर्फ एक ही कैबिनेट स्तर की जगह है बाकी राज्यमंत्री हैं। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कुल मिलाकर यूपीए के 82 सांसद चुने गए हैं। इनमें से 26 को नए मंत्रिमंडल में जगह मिली है। 11 को कैबिनेट स्तर मिला है। तमिलनाडु से इस गंठजोड़ के 27 सांसद हैं जिनमें से दस को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

इनमें से कैबिनेट स्तर पर पी चिदंबरम और पी के वासन कांग्रेस के हैं, जबकि दयानिधि मारन, एम अझगिरी और ए राज द्रमुक के हैं। पुड्डूचेरी के अकेले सांसद वी नारयणस्वामी को मंत्रिमंडल में जगह मिल गई है। 16 सांसद देने वाले केरल को छह मंत्री मिले हैं- ए के एंटनी, व्यालार रवि, शशि थरूर, मल्लापल्ली रामचंद्रन, के वी थॉमस(सभी कांग्रेस) और ई अहमद(मुस्लिम लीग)। पिछली बार केरल से पार्टी का एक भी सांसद नहीं जीत सका था, इस बार 16 जीते हैं।

मंत्रियों की संख्या के मामले में आंध्र प्रदेश ओर कांग्रेस का मामला एक दूसरे के उलट है। भाजपा शासन वाले कर्नाटक से इस गंठजोड़ के सिर्फ छह सांसद जीते हैं लेकिन मंत्रिमंउल की छह जगह कर्नाटक के नाम रही हैं। जबकि आंध्र प्रदेश को 33 सांसदों की सबसे बड़ी जीत के बावजूद सिर्फ पांच मंत्रिपद ही मिल सके हैं। इनमें से एस जयपाल रेड्डी अकेले ऐसे हैं जिन्हें कैबिनेट स्तर दिया गया है। बाकी पनाबाका लक्ष्मी, दुग्गुबती पूरनधरेश्वरी, पी सई प्रताप और एम एम पल्लम राजू राज्यमंत्री बनाए गए हैं।

आंध्र प्रदेश के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया गया इसकी भी एक कहानी है और इस भेदभाव के बावजूद अगर राज्य में किसी ने चूं तक नहीं की तो इसकी भी एक कहानी है। मंत्रिमंडल में पदों के मामले में आंध्र प्रदेश पर यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोई मेहरबानी नहीं की तो इसकी वजह वाई एस राजशेखर रेड्डी का बड़ा दिल है।

जिन्होंने दूसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री पद संभाला है। वे अच्छी तरह समझते हैं कि गंठजोड़ के कारण विभिन्न राज्यों के सहयोगी दलों के केंद्रीय नेतृत्व पर किस तरह के दबाव हैं। उन्हें यह भी पता है कि जिन राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उनके ज्यादा लोगों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देने का क्या फायदा हो सकता है। पार्टी के बड़े हित के लिए वे वह मंत्रिपदों की अपनी दावेदारी को समर्पित करने के लिए वे पूरी तरह तैयार थे। इसके लिए सेानिया गांधी और मनमोहन सिंह दोनों ने ही उनका शुक्रिया भी अता किया। जब वे हैदराबार लौटे तो उनके चेहरे पर एक अभामंडल था। वे पूरे परोपकारी बन चुके थे।

लेकिन असल कारण जिसके चलते सोनिया गांधी से वार्तालाप के बाद उन्होंने या फैसला किया उतना अच्छा नहीं था। वे नहीं चाहते थे कि प्रदेश का कोई भी नेता मंत्रिमंडल में जगह पाकर आला कमान में अपना रुतबा न बढ़ा ले। इससे पार्टी की राज्य इकाई में एक वकल्पिक सत्ता केंद्र बन जता। जो बाद में उनके राजनैतिक भविष्य के लिए खतरा भी बन सकता था। उन्होंने एक तीर से दो शिकार कर लिए थे।

एक और कारण यह भी था कि विधानसभा चुनाव में जीत का Þोय न तो पार्टी केा दिया ज सकता है और न ही मुख्यमंत्री को। उनके मंत्रिमंडल के आधे मंत्री अपना चुनाव हार गए। हारने वालों में पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डी Þाीनिवास और विधानसभा अध्यक्ष सुरेश रेड्डी भी थे। अगर राज्य सरकार की लोकप्रियता सचमुच अच्छी होती तो शायद यह नहीं होता।

जो कांग्रेस विधायक दुबारा चुनाव जीतने में कामयाब रहे उनकी संख्या 155 है, यानी विधानसभा के बहुमत से दस कम। और 33 लोकसभा सीटों पर जीत के हिसाब से देखें तो पार्टी को कम से कम 200 विधानसभा सीटें जीतनी चाहिए थीं। सच यह है कि जनता राज्य सरकार से खुश नहीं थी लेकिन वह चाहती थी कि नई दिल्ली में संप्रग की सराकर ही बने। कुछ मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टचार के आरोपों ने भी असर दिखाया। फिर अगर पार्टी जीती तो इसलिए कि राज्य में पहली बार बहुकोणीय चुनाव हो गया था। कांग्रेस को मतविभाज का फायदा मिल गया।

radhaviswanath73 @yahoo. com

लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आंध्र प्रदेश : इस भेदभाव की वजह क्या है