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वन क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा प्रथम तो नोएडा पांचवे स्थान पर

वन क्षेत्र के मामले में नोएडा एनसीआर के शहरों में सबसे पीछे है। हालांकि हाल ही में भारतीय वन सर्वे द्वारा सैटेलाइट से लिए गए चित्रों के आधार पर जारी आंकड़ों में ग्रीनरी के मामले में ग्रेटर नोएडा को प्रथम पायदान पर रखा है। इस मामले में नोएडा का नंबर गाजियाबाद, गुड़गांव व फरीदाबाद के बाद आता है। वर्ष 2001 में  हुए इसी तरह के सर्वे में नोएडा को ग्रीनरी के मामले में प्रAथम पायदान पर था।


17 अप्रैल 1976 में नोएडा की स्थापना बतौर इंडस्ट्रियल एरिया किया गया, लेकिन 33 साल पूरा होने के साथ ही नजारा बिल्कुल अलग है। नोएडा को कंक्रीट का जंगल बनाने के लिए हजारों पेड़ों की बलि दी गई। मुख्यमंत्री के अरमान को पूरा करने के लिए नंदन कानन पार्क को उजाड़ कर मूर्तियां व संग्रहालय बनाया जाना इसका एक ताजा उदाहरण है। अथॉरिटी के दावों में नोएडा हरा-भरा शहर के रूप में दर्ज है। आंकड़ों की मानें तो अब तक आठ सौ हेक्टेयर में ग्रीन बेल्ट, ढाई सौ पार्क और 250 रोड किलोमीटर में वृक्षारोपण हो चुका है। नोएडा के कुल भूंखड 20316 हेक्टेयर में से 35.66 प्रतिशत एरिया में आवास व इतने ही एरिया में उद्योग बने हैं। बीते वित्तीय वर्ष में 11 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया है। हालांकि सर्वे रिपोर्ट में सच्चाई सामने है।


क्षेत्र के पर्यावरणविद् वीपी बघेल ने माना कि वर्ष 2001 में पहले पायदान पर रहने के बावजूद नोएडा ग्रीनरी के मामले में 5वें पायदान पर पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण है योजनाबद्ध तरीके से विकास न होना। कभी सड़क को चौड़ा करने पर तो कभी मेट्रो सिटी बनाने के लिए बेरहमी से पेड़ काट दिए जाते हैं। अफसर एक बार पेड़ लगाती है, बाद में खुद से कटवा देती है। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी तंत्र व आम पब्लिक में जागरुकता की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया।


भारतीय वन सर्वे के आंकड़े


ग्रेटर नोएडा                 -1.82
गुड़गांव                        -1.58
फरीदाबाद                    -1.54
गाजियाबाद                   -1.50
नोएडा                           -1.42

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  • Web Title:ग्रीनरी मामले में एनसीआर में पिछड़ा नोएडा