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किसानों की याचिका खारिज, पुराने आदेश बरकरार

न्यायालय में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब 20 गांवों के करीब आठ हजार किसानों को 6.80 रुपये प्रति वर्ग गज के रेट के मुआवज पर ही संतोष करना पड़ेगा। यूपीएसआईडीस बनाम किसानों के बीच इस कानूनी जंग में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर हाईकोर्ट के पुराने आदेश को बरकरार रखा है। मुआवजे की दर साढ़े आठ रुपये से घटाकर 6.80 वर्ग गज कर दी गई थी। प्रशासन इस रेट से कई गुना की दर पर मौजूदा समय में मुआवज बांट रहा है, लेकिन इन किसानों को इससे ही संतोष करना पड़ेगा।

वैसे अदालत में करीब 47 वर्ष से न्याय की उम्मीद में फैसले का इंतजर करने वाले किसानों को इस आदेश के बाद मायूसी भी हुई है। किसान संगठनों में इस फैसले को लेकर आक्रोश है। वरिष्ठ वकील जवाहर सिंह चौधरी, ललित चौधरी और बीपी त्यागी ने बताया कि 1962 में मास्टर प्लान के अंतर्गत रजपुर, सिहानी, बम्हैटा, डूंडाहैड़ा, कैला भट्ठा, करहैड़ा, पसौंडा, जटवाड़ा, सिद्दिक नगर आदि 20 गांवों की जमीन अधिग्रहित हुई थी। इसके बदले किसानों को 1.5 रुपए प्रति वर्ग गज का मुआवज दिया गया।

हेमचंद नामक किसान ने 1977 में सेशन कोर्ट में मुकदमा डाला। वर्ष 1984 में भारत सरकार ने भू अजर्न अधिनियम में संशोधन कर धारा 28 ए में लागू कर दी। इसमें प्रावधान था कि जो किसान मुआवजे से असंतुष्ट है और किसी कोर्ट में नहीं गए, वह भी कोर्ट का आदेश आने पर 90 दिन के अंदर डीएम के यहां प्रार्थना पत्र देकर नई दर का मुआवज पा सकते हैं। इसी बीच 1987 में सेशन कोर्ट ने मुआवज बढ़ाकर 8.5 रुपए प्रति गज कर दिया।

इसके फैसले खिलाफ यूपीएसआईडीसी अपील में हाईकोर्ट चली गई। जिस पर 2003 में हाईकोर्ट ने मुआवज घटाकर 6.80 रुपए प्रति वर्ग गज कर दिया। इसके खिलाफ हेमचंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके पीछे ही यूपीएसआईडीसी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।

20 मई को न्यायमूर्ति वीएस सिरपूरकर और आरएम लोढा की खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर हाईकोर्ट के पुराने आदेश पर मुहर लगा दी।अधिवक्ता ने बताया कि इस आदेश से 47 साल बाद भी करीब 8000 किसानों को धारा 28 ए के अंतर्गत 6.80 रुपए प्रति वर्ग गज का मुआवज ही मिल पाएगा। 

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  • Web Title:मुआवजे पर किसानों को झटका