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परानॉय सिजोफ्रेनियाः बरतें पूरी सावधानी

पैरानॉय सिजोफ्रेनिया पागलपन का ऐसा कारण है जिसमें रोगी को लगता है कि उसे कोई पसंद नहीं करता और सभी मिलकर उसे मार देना चाहते हैं। इससे वह हर वक्त भयभीत और सशंकित रहता है और अपने आसपास रहने वाले सभी लोगों पर शक करने लगता है। अक्सर उसे लगता है कि घर के बाहर कोई उसे पुकार रहा है। यहाँ तक कि कई बार तो उसे लगता है कि टीवी या रेडियो पर भी उसका ही नाम लिया जा रहा है।

अभिनेत्री परवीन बाबी भी अपनी मौत से पहले काफी समय तक इसी बीमारी की शिकार रही थीं। इसी तरह मशहूर अभिनेता आमिर खान के भाई फैजल खान ने भी फिल्मों में सफल न होने के कारण अपना मानसिक नियंत्रण खो दिया था। माना जाता है कि यह बीमारी अकेलेपन और नाकामयाबी की वजह से होती है और समय से उचित इलाज न होने पर जानलेवा होती जाती है। 

कॉलेज जाने वाले एक छात्र ने पढ़ाई में रुचि लेना अचानक बंद कर दिया, कॉलेज जाना बंद कर दिया और नहाना धोना छोड़कर घर में कमरा बंद करके रहने लगा। उसे लगने लगा कि लोग उसका मजाक बनाएंगे इसलिए वह उनके ही खिलाफ उन्हें तंग करने की साजिश करने लगा। कोई इलाज न होने पर उसकी बीमारी बढ़ती गई। छह महीनों के बाद ही यह इतनी बढ़ गई कि उसने अपनी ही माँ पर उस पर काला जादू करने का आरोप लगाते हुए उसे बहुत तंग किया। बाद में डाक्टरों ने उसे पागलपन के एक कार पैरानॉय सिजोफ्रेनिया से ग्रस्त बताया।

डाक्टरों का कहना है कि इस बीमारी को अगर जल्दी ही पहचान लिया जाए तो इसका इलाज हो सकता है, लेकिन अगर यह बढ़ गई तो मरीज को ठीक कर पाना बहुत मुश्किल होता है। यह बीमारी इतनी गंभीर है कि अगर मरीज समय से दवाई और डॉक्टर की सलाह लेता रहे तो इस पर काबू पाया जा सकता है लेकिन इसे पूरी तरह से ठीक कर पाना संभव ही नहीं है। इलाज में कोताही बरतने पर रोगी को दोबारा भी दौरे पड़ सकते हैं।

खास बात यह कि बीमारी परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती है। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के बच्चों को यह बीमारी न हो, इसकी संभावना 85 फीसदी होती है। इसके अलावा इसमें न्यूरॉन के विकास का भी योगदान हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति के न्यूरॉन के विकास में संतुलन नहीं है तो भी इस कारण से उसे पैरानॉय सिजोफ्रेनिया हो सकता है। तनाव इसे और बढ़ाता है।

जिन्हें इस बीमारी के एक या ज्यादा दौरे पड़ चुके हों, ऐसे मरीजों को कम से कम दो से पाँच साल तक दवा का सेवन करना चाहिए। कई बार उनको ताउम्र दवा खानी पड़ती है। परिजनों को इसका ध्यान रखना चाहिए कि वे समय से दवा खाएँ। अगर कोई मरीज दवा नहीं खाता है तो उसे अस्पताल में भर्ती कराना ही ज्यादा बेहतर होगा।

अगर आप किसी व्यक्ति को अपने आप से बातें करते देखें, अत्यधिक शक करते हुए देखें, बिना वजह गाली गलौज, खयालों में खोये खोये हुए या चेहरे को अजीब अजीब मुद्राएँ देते हुए देखें, उसे ठीक से नींद न आती हो और वह दूसरों पर साजिश करने का आरोप लगाता रहता हो तो हो सकता है कि वह व्यक्ति पैरानॉय सिजोफ्रेनिया से ग्रस्त हो। उसे तुरंत डाक्टर के पास ले जाएँ और सलाह लें। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति को कभी खाली या अकेला न छोड़ें और उसे किसी काम धंधे में लगाएँ। उसे इस बीमारी के बारे में बताने में पूरी सतर्कता बरतें ताकि उसे यह न लगे कि आप उसे पागल बता कर अपना कोई मतलब साधना चाहते हैं या उसे पागल बता कर पागलखाने भेजना चाहते हैं।

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