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टेम्परेरी इनसेनिटी

मनोरोगों की जटिल दुनिया में टेम्परेरी इनसेनिटी यानी अस्थायी पागलपन की बीमारी मनोविश्लेषकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इससे ग्रसित व्यक्ति न तो पूरी तरह सामान्य समझ जाता है और न ही उसे असामान्य व्यक्ति की श्रेणी में रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार टेम्परेरी इनसेनिटी किसी बीमारी का नाम नहीं, बल्कि उसे कई तरह के मनोरोगों का संयुक्त रूप कहा जा सकता है। दरअसल, सच तो यह है कि टेम्परेरी इनसेनिटी का नाम अब चिकित्सा जगत में इस्तेमाल ही नहीं किया जता। इसे अब केवल कानून की दुनिया में ही इस्तेमाल में लाया जता है क्योंकि इससे जुड़े कानूनी पहलू भी इसकी प्रकृति की तरह जटिल हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे पीड़ित व्यक्ति कभी क्रोध में कुछ ऐसे कार्य कर गुजरता है जिनकी सामान्य अवस्था में उसे याद तक नहीं रहती। उसकी गतिविधियां अनियंत्रित और निर्धारण की सीमा से परे रहती हैं। इसलिए कानूनी दृष्टि में टेम्परेरी इनसेनिटी का मसला बहुत जटिल हो जता है।

मनोविश्लेषक कहते हैं कि कई समान तरह के अलग-अलग मनोरोगों को टेम्परेरी इनसेनिटी मान लिया जाता है। इसलिए एक रोग के तौर पर इसके इलाज का सवाल बेमानी है। इसकी ठोस वजह के प्रमाण फिलहाल चिकित्सा जगत में उपलब्ध नहीं हैं।

माना जाता है कि कोई व्यक्ति मानसिक तौर पर बीमार हो सकता है, लेकिन उसके बावजूद वह पागल नहीं होता। पश्चिम जगत में कानून इस तर्क को मानने से पूर्व कई तरह की शर्ते रखता है। जसे अभियुक्त किसी अपराध का जिम्मेदार हो तो भी वह होश में रहता है और वह सही-गलत में अंतर कर सकता है। टेम्परेरी इनसेनिटी से जुड़ी दरखास्त तब कानूनी दृष्टि से अधिक कारगर साबित होती है जबकि अभियुक्त पैरानॉय सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हो और उसकी पैरवी करने वाला वकील उसकी बीमारी के इतिहास के बारे में अदालत को यकीन दिला सके। ऐसे में वह किसी भी अवस्था में हो अदालत उसे सज देने से पूर्व सोचती है।

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  • Web Title:टेम्परेरी इनसेनिटी