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विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को नई शक्ल देना बड़ी चुनौती

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर अखिलेश यादव की नियुक्ित पार्टी में नई पीढ़ी का आगाज है। दो दिन पहले पार्टी प्रमुख मुलायम ¨सह यादव ने सभी राज्य व जिला इकाइयों को भंग कर पार्टी में जिस सफाई अभियान की शुरुआत की थी उसके बाद अखिलेश पहली नियुक्ति हैं। साफ है कि अखिलेश के कंधों पर पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी डाली है।

पार्टी को तीन साल बाद के विधानसभा चुनाव के लिए नए तेवर और कलेवर के साथ पेश करना उनकी बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसलिए भी कि यूपी में फिर से ताकत बटोर रही कांग्रेस अपने युवा चेहरे राहुल गांधी को सामने कर हिन्दी पट्टी के इस अहम सूबे में अपनी वापसी करना चाहती है। यूपी में अब युवा चेहरों की सियासत तेज होगी। दिल्ली से फोन पर हिन्दुस्तान से बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया में अखिलेश बोले-संघर्ष के दौर में जिम्मेदारी मिली है। इसे निभाने को तैयार हूँ।

लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन का संसदीय दल की बैठक में विश्लेषण करते हुए सपा प्रमुख ने पार्टी के कायाकल्प पर जोर दिया था। यूपी सपा का गढ़ है। अब तक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे शिवपाल ¨सह यादव को विधानमण्डल दल के नेता की जिम्मेदारी भी सौंपी ज चुकी थी। लिहाज प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी और को लाना था। अमर ¨सह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस राय के थे कि अखिलेश को यह जिम्मेदारी सौंपने का यही वक्त है। इससे पार्टी को युवा और तरोताज शक्ल देने में मदद मिलेगी। कई नेताओं ने इसे मौजूदा दौर की जरूरत बताया।

युवाओं को और तवज्जो देने की सपा की नीति अब और परवान चढ़ेगी यह तय है। देश में 51 फीसदी से ज्यादा आबादी युवा होने के मद्देनजर नई बनने वाली सभी कमेटियों में 51 फीसदी युवा चेहरों को जगह देने की तैयारी है। विधानसभा के अगले चुनाव में भी आधे प्रत्याशी युवा होंगे। अब अखिलेश यादव को अगले दो साल के भीतर ऐसे युवा चेहरों की तलाश कर उन्हें पार्टी के खाँचे में फिट करना होगा। एक बड़ी चुनौती अखिलेश के सामने है। उनके लिए राहत की बात है कि युवा प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय प्रभारी की हैसियत से उन्होंने युवाओं की टीम बना रखी है।

अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही कई हलकों से पार्टी में परिवारवाद पर हो रही टिप्पणियों पर अखिलेश बोले-पार्टी विपक्ष में है। संघर्ष के दौर में मिली जिम्मेदारी पर परिवारवाद की टिप्पणियाँ ठीक नहीं। सपा के राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ समाजवादी चिंतक ब्रजभूषण तिवारी बोले-अखिलेश तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। पार्टी में सांगठनिक जिम्मेदारी निभाते रहे हैं। उन्हें घर से लाकर तो बिठा नहीं दिया गया है। फिर कैसा परिवारवाद?

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  • Web Title:अखिलेश के साथ सपा में नई पीढ़ी का आगाज