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सौम्य, मृदुभाषी व मिलनसार हैं मीरा कुमार

सौम्य, मृदुभाषी व मिलनसार हैं मीरा कुमार

अपने पिता स्वर्गीय जगजीवन राम के अधूरे सपने और संकल्प को पूरा करने के लिए भारतीय विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं मीरा कुमार स्वभाव से अत्यंत सौम्य, मृदुभाषी और मिलनसार हैं।

मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुने जाने के साथ ही इस पद पर पहुंचने वाली देश की पहली महिला बन गई हैं। भारतीय राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले बाबू जगजीवन राम के घर में पली-बढ़ी मीरा कुमार कांग्रेस के टिकट पर पहली बार 1985 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से उप चुनाव लड़ी थी और तब उन्होंने मायावती और रामविलास पासवान को पराजित कर राजनीति में धमाकेदार शुरुआत की थी।

31 मार्च 1945 को जन्मी मीरा कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के महारानी गायत्री देवी स्कूल में हुई। उन्होंने 1968 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। वर्ष 1971 में वह विदेश सेवा में गईं।

मीरा कुमार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयास से 1990 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं। वह 1996 में दिल्ली के करोलबाग से सांसद चुनी गईं। मीरा कुमार वर्ष 1968 में बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री सुमित्रा देवी के बड़े पुत्र मंजुल कुमार से परिणय सूत्र में बंधी।

मीरा कुमार बिहार से पहली बार 2004 के लोकसभा चुनाव में सासाराम (सु) सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गईं। इसके बाद इसी क्षेत्र से पुनः कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत कर सांसद बनी हैं। इस सीट से उनके पिता बाबू जगजीवन राम 1952 से लेकर 1984 तक लोकसभा चुनावों में विजयी रहे थे। मीरा कुमार पिछली सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थी और उन्हें मनमोहन की दूसरी पारी में भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

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