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सर्व सेवा संघ में युवा प्रशिक्षणार्थी शिविर का दूसरा दिन

जिस दिन इस पृथ्वी से नदियां समाप्त हो जएंगी, उस दिन जीवन समाप्त हो जएगा। जीवन का संबंध जल से है और नदियां मनुष्य के सर्वाधिक काम आती हैं। मनुष्य का कोई भी काम बिना पानी के नहीं हो सकता। यह बातें मैगसैसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने मंगलवार को सर्व सेवा संघ राजघाट में चल रहे युवा प्रशिक्षण शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में कहीं।  

उन्होंने कहा कि यदि देश की नदियां सदा नीरा नहीं हुई तो देश नष्ट हो जएगा। धरती को पानीदार बनाने का मतलब उससे जितना पानी हम लेते हैं, उतना पानी धरती के पेट में डालना। उन्होंने गंगा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब हमें इन नालों को गंगा में गिरने से रोकना होगा। नालों का पानी खेती में प्रयोग हो। उन्होंने कहा कि आज देश में जो संकट है उससे पूरे ब्रह्मांड का मिजज बदल रहा है। शिक्षण में जहां ज्ञान प्राप्त होता है वही प्रशिक्षण में रचना के गुण मिलते हैं।

राष्ट्रीय युवा प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन प्रथम सत्र में जीवन-मूल्य व समाज निर्माण संदर्भ एकादश व्रत पर आचार्यकुल की अध्यक्षा बहन प्रवीणा देसाई ने कहा कि मनुष्य मात्र एक जीव है, जो स्वयं को प्रशिक्षित कर सकता है। अन्य जीव यह कार्य नहीं कर सकते। सारी दुनिया आज सत्य पर चल रही है।

खेती-किसानी की समस्या व विकल्प की दिशा पर उद्बोधन करते हुए प्रमुख वक्ता प्रो. रामकृपाल पाठक ने खेती-किसानी व उनकी समस्याओं पर किए गये अपने प्रयोगों को प्रशिक्षणार्थियों के सम्मुख रखा और विकल्प की दिशा भी तय की। कार्यक्रम के पूर्व सर्व सेवा संघ के संयोजक रामधीरज भाई ने जलपुरुष राजेन्द्र सिंह का जीवन परिचय बताया। संचालन कार्यक्रम संयोजक अशोक भारत ने किया।

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  • Web Title:नदियों पर संकट मतलब देश खतरे में : राजेन्द्र