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भाजपा कार्यालय में कलराज मिश्रा के साथ बिताए 20 मिनट

यह संयोग मात्र नहीं था कि भाजपा के थिंक टैंक रहे गोविंदाचार्य ने काशी के भाजपा कार्यालय का चक्कर लगा लिया। मंगलवार को अचानक गुलाबबाग कार्यालय में उनका धमकना राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दे गया। मीडिया से आंख बचाने की कोशिश के बावजूद जब सामना हुआ तो उन्होंने इसे महज संयोग ही बताया लेकिन कयासबाजियां अचानक तेज हो गयीं। इस सवाल पर कि क्या भाजपा से गिले-शिकवे दूर हो गए, गोविंदाचार्य ने खुद सवाल दाग दिया कि शिकवे रहे ही कब?

गोविंदाचार्य के बारे में जनने वाले मानते हैं कि वह अनायास कोई चाल नहीं चलते। भाजपा कार्यालय में उनका पहुंचना महज इत्तेफाक नहीं माना ज सकता। वह ऐसे वक्त पहुंचे जब भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा भी गुलाबबाग में ही मौजूद थे। यह भी संयोग मात्र नहीं हो सकता कि कुछ क्षण पहले ही पत्रकारों से बातचीत में कलराज मिश्रा ने गंगा स्वच्छता अभियान के बहाने ही गोविंदाचार्य की तारीफ भी कर डाली। सूत्रों का कहना है कि गोविंदाचार्य तकरीबन 20 मिनट तक गुलाबबाग कार्यालय में रहे और कलराज मिश्रा से गुफ्तगू भी हुई।

इन सारी बातों के निहितार्थ यही निकाले ज रहे हैं कि उमा भारती के हृदय परिवर्तन के बाद अब गोविंदाचार्य की बारी है और किसी वक्त उनकी घर वापसी हो सकती है। दरअसल गोविंदाचार्य अचानक गुलाबबाग कार्यालय में दिखे तो लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक थी। राजनीतिक चतुर गोविंदाचार्य की निगाह मीडिया से टकरायी तो उनकी चाल तेज हो गयी और पार्टी कार्यालय की सीढ़ियों पर तेजी से कदम भरते हुए नीचे उतर आए।

‘हिन्दुस्तान’ ने उन्हें घेरा तो पीछा छुड़ाने लगे। अरे भाई! मित्रों से मिलने की इच्छा हुई चले आए। और कोई बात नहीं है। यहां अपने बहुत से लोग हैं। इच्छा हुई मिल लें। बस आ गए। सवाल हुआ कि क्या घर वापसी के दिन करीब आ गए हैं। गिले-शिकवे दूर हो गए हैं? बाल सुलभ भाव में बोले, शिकवे थे ही कब? हां, अध्ययन अवकाश से लौटने के बाद मैंने माना था कि भाजपा अब भगवा कांग्रेस बनकर रह गयी है। राजनीतिक दल अमीर परस्त हो गए हैं। गरीबों, किसानों की कोई बात नहीं हो रही है। इससे भाजपा भी अछूती नहीं है। कुछ देर की संक्षिप्त बातचीत के बाद स्कार्पियो में बैठकर वह कहीं और निकल गए।

दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले गोविंदाचार्य खुद का कर्म क्षेत्र काशी ही मानते रहे हैं। यहां के गली-मोहल्लों से वह वाकिफ हैं। उन्होंने अनुयायियों की बड़ी तादाद खड़ी की है। वक्त बे वक्त वह काशी आते रहते हैं। भाजपा से मोहभंग होने के बाद अचानक गुम होने की खबर आयी तो ढूंढ़ने पर काशी में ही गंगा किनारे शूल टंकेश्वर (माधोपुर) में देखे गए। भाजपा को विचारों से न भटकने देने के लिए अपने पुरजोर प्रयास के तहत उन्होंने कई नेताओं से पंगेबाजी मोल ली, जिन्होंने सत्ता सुख के लिए उन्हें रास्ते का रोड़ा समझ। बहरहाल, वर्षो बाद गोविंदाचार्य के कदम भाजपा कार्यालय में पड़े तो पार्टी के पुराने लोगों के चेहरे पर अलग भाव भी झलक रहा था।

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  • Web Title:तो घर वापस होंगे गोविंदाचार्य !