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महंगाई कम करने की तत्परता दिखाए

लोकसभा चुनाव 2009 से कई बातें साफ हो गई हैं। हम भारतीय स्थायित्व में विश्वास करते हैं। कांग्रेस की जीत स्थायित्व की जीत है। इसके साथ ही अगर ये हो जाए कि सभी दलों का विलय हो और पक्ष और विपक्ष सिर्फ दो पार्टी हों। मतदान कम से कम हाईस्कूल पास हों। उम्मीदवार कम से कम ग्रेजुएट हों।  राजनीति व नेताओं में जनता का विश्वास लौटे। प्रशासन में लोगों का विश्वास लौटे, ऐसा प्रयास हो। आगामी सरकार से उम्मीद है कि वह त्राहि-त्राहि कर रही जनता के लिए महंगाई कम करने में तत्परता दिखाएगी।

शिव प्रकाश शर्मा, अयोध्यापुरी, हापुड़

धन पाने की चाह में

लोकसभा के चुनाव समाप्त होते ही निगम में हाउस टैक्स बढ़ाने की चर्चा चल पड़ी। धन की कमी है, लेकिन इसके कारण नगर निगम की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। दरअसल एक बड़ा वर्ग जानते-बूझते भी अपनी सम्पदा की केटेगरी  निम्न स्तर की दिखाता है और निगम के अधिकारी व कर्मचारी उसे स्वीकार करते चले जाते हैं। बहुत से लोग हाउस टैक्स जमा ही नहीं करा रहे, जिसकी नगर निगम को कोई चिंता अभी तक नहीं सता रही।

भगवान स्वरूप नागर, नई दिल्ली

युवा भारत की भाषा मातृभाषा

अगाथा के हिंदी प्रेम ने मोहा सबका मन मंत्रिमंडल की युवा सदस्य अगाथा संगमा को हिंदी में शपथ लेते देखना सुखद और विस्मयकारी था। देशी मुर्गी बिलायती बोली बोलने वालों के मुंह पर तमाचा भी था। पाओलो कोएल्हो नामक विश्लेषक के इस कथन की भी पुष्टि करता था कि आनेवाले दिनों में एथनिक और स्थानीयता प्रवृत्तियों की बहुत तेजी से वापसी होगी। अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए लोग अपनी भाषाओं की ओर और कट्टरता से लौटेंगे। अगाथा का हिंदी प्रेम बताता है कि युवा भारत बहुभाषीय है, व्यापक देश तक पहुंचना चाहता है।

प्रभात कुमार, रमेश नगर, नई दिल्ली

बस सेवा या लटकती भीड़

बढ़ती यात्री संख्या के कारण दिल्ली में बसों में भीड़ व दौड़ कर बसों में लटकते यात्रा करना आम बात है। फिर डीटीसी की बस में चढ़ने के बाद टिकट खरीदने हेतु कंडक्टर तक पहुंच पाना अगली कठिनाई। मुंबई की वेस्ट सेवा की तरह कंडक्टर यात्रियों तक स्वयं आ कर टिकट दे। दो कंडक्टर व्यवस्था हो व टिकट सीट पर उपलब्ध हो।

हरिओम मित्तल, गुड़गांव, हरियाणा

मानवाधिकार की जनकारी

डॉ. विनायक सेन को जमानत से संबंधित समाचार पढ़ा। जरूरी बात यह है कि इस भूमिका को निभाने में मानवाधिकारी कार्यकर्ताओं को विभिन्न पक्षों के संपर्क में रहना पड़ता है। शायद इसी संपर्क को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवादी नेताओं से संपर्क का आरोप लगाकर विख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. विनायक सेन को गिरफ्तार कर लिया था। ध्यान देने की बात है कि यदि विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधियों से मानवाधिकार कार्यकर्ता मिलेंगे नहीं तो उनका पक्ष कैसे जनेंगे और टकराव टालने में सार्थक भूमिका कैसे निभाएंगे।

विभा झा, सरस्वती गार्डन, नई दिल्ली

रुसवाई से क्यों डर रहा
रुसवाई से क्यों डर रहा,
फरहाद बन के जी।
पत्थर को काट डालेगा
शीरीं का नाम ले।।

अशोक, नई दिल्ली

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