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रेल पर गुस्सा

चक्का जाम में रुकी हुई रेलगाड़ियां हों या जलाए गए ट्रेन के डिब्बे हों, आंदोलनों में भीड़ का सबसे निरीह निशाना रेलवे ही बनती है। सबसे ताजा घटना बिहार में हुई, जहां एक रेलगाड़ी का स्टॉप रद्द करने के विरोध में लोगों ने दो रेलगाड़ियों के छह डिब्बे जला दिए। इसके कुछ दिन पहले पंजब में हुए आंदोलन का निशाना भी रेलगाड़ियां थीं। गुजरात के कुख्यात दंगों की शुरुआत भी गोधरा में एक रेलगाड़ी के डिब्बे में लोगों के जल मरने से ही हुई थी। रेलगाड़ियों को रोकने या उन्हें नुकसान पहुंचाने से उन रेल यात्रियों को सबसे ज्यादा भुगतना होता है, जो अपने घर-बार से सैकड़ों किलोमीटर दूर फंस जते हैं। रेलवे अब भी हमारे देश की धमनियां हैं, जिनके रुक जने से दूर-दूर तक आहट होती है और इसलिए शायद उपद्रवी रेलों को निशाना बनाना पसंद करते हैं। रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पीछे एक तत्व और काम करता है कि इसके आरोपियों को कभी सज नहीं होती। दूसरी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में एक खतरा यह रहता है कि स्थानीय थाने में मामला दर्ज हो जए और गिरफ्तारी वगैरा भी हो जाए। रेलवे के नुकसान को स्थानीय प्रशासन भी ज्यादा तवज्जो नहीं देता और रेलवे की अपनी सुरक्षा एजेंसियां निकम्मी से निकम्मी राज्य पुलिस से भी कम कार्यकुशल है। रेलवे भारत के सर्वाधिक कार्यकुशल सरकारी उद्यमों में से है, लेकिन उसकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है।

रेलगाड़ियों में सफर कर रहे यात्री स्थानीय लोगों के रहमोकरम पर ही सुरक्षित रहते हैं। रेलवे को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवी इतने आश्वस्त होते हैं कि अक्सर रुकी हुई ट्रेन या जलते हुए डिब्बे के साथ विजय गर्व में अपनी तस्वीरें खिंचवाने और अखबारों और टीवी पर दिखाए जने से भी नहीं हिचकते। यह कभी सुना नहीं गया कि इन तस्वीरों को प्रमाण मान कर इन उपद्रवियों पर कोई कार्रवाई करने की कोशिश हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने अलबत्ता राजस्थान में आरक्षण आंदोलन के दौरान नष्ट हुई सार्वजनिक संपत्ति के लिए आंदोलनकारियों से जुर्माना वसूलने को कहा था। लेकिन स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग जब तक इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेगा तब तक ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगेगी। बिहार वाले मामले में क्या हुआ, रेल मंत्री ममता बनर्जी ने ट्रेन के स्टॉप बहाल कर दिए और आंदोलनकारियों पर कोई कार्रवाई न करने का निर्णय लिया। फिर लोग क्यों जलते डिब्बों के सामने तसवीरें न खिंचवाएं?

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