class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लखनऊ से भेज गया अनाज खाने योग्य नहीं : गाजियाबाद प्रशासन

जेलें सुधारगृह तो तब बनेंगी, जब बंदियों के साथ अंग्रेजों जैसा सलूक बंद हो! सरकार आंखें मूंदे है और बंदियों के खाने को ऐसा अनाज भेज जा रहा है, जिसे अफसर देख भी नहीं सकते। गाजियाबाद प्रशासन ने लखनऊ से डासना जेल भेजी गई सैकड़ों कुंतल गेहूं की जिस सप्लाई को सिरे से रिजेक्ट कर दिया था, जेलवाले बंदियों को फिर भी उसी के आटे की रोटी खिला रहे हैं। अनाज सप्लायर वाराणसी की फर्म का चित्त हैडक्वार्टर भेज गया है। अब जब बड़े अफसर जगेंगे, तो सलाखों के पीछे कैद लोगों को अच्छी रोटी नसीब होगी।

गाजियाबाद की डासना जेल में ढ़ाई हजार से अधिक बंदी और कैदी हैं। क्षमता के मुकाबले यह संख्या दोगुने से भी ऊपर है। अफसरों के मुताबिक, इतने लोगों को खाना खिलाने के लिए रोज करीब 18 कुंतल गेहूं और ढ़ाई कुंतल चावल खपाना पड़ता है। बीच में अनाज कम न पड़े, इसलिए जेल प्रशासन के पास हमेशा एक महीने का स्टॉक रिजर्व में रहता है। अनाज की सप्लाई वह फर्म करती है, जिसे शासन ठेका देता है।

एडीएम सिटी एसके श्रीवास्तव बताते हैं, पिछले दिनों वाराणसी की मै. ओम ब्रदर्स फर्म ने डासना जेल में 698 कुंतल गेहूं और 77 कुंतल चावल भेज था। कारागार अफसरों को गेहूं-चावल की क्वालिटी बहुत घटिया लगी। अनाज कैदियों के खाने योग्य है कि नहीं, इसकी जंच जेल खाद्य निरीक्षण समिति के सदस्य और अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रेमप्रकाश ने की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा कि यह अनाज बहुत खराब है और बंदियों के खाने योग्य नहीं।

एडीएम सिटी ने एसीएम की जंच रिपोर्ट के साथ महानिदेशक जेल को लिखित में इस पूरे मामले से अवगत कराया और इस गड़बड़ी के लिए अपने स्तर से पड़ताल कराने की गुजरिश की। कई दिन हो चुके हैं, डीजी हैडक्वार्टर ने इस गंभीर मामले पर अपनी चुप्पी नहीं तो ड़ी है।

इधर, जेल प्रशासन ने ज्यादा खराब माने गए चावल को तो लौटा दिया है, मगर जंच के बाद रिजेक्ट घोषित किए गए उसी गेहूं का कैदियों के खाने में इस्तेमाल करा रहा है। जेल के अफसरों को अपने से ऊपर के अधिकारियों के जवाब का इंतजर है, जो कब आएगा, किसी को नहीं पता?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कैदियों को खिला रहे रिजेक्टेड गेहूं