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धूल फांक रहीं जन सूचना की फाइलें

पब्लिक को सूचना का अधिकार सिर्फ इसलिए दिया गया है, ताकि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनी रहे। पब्लिक को किसी भी तरह की सूचना आसानी से मिल सकें। हालांकि यह व्यवस्था दफ्तरों में सही तरह प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही। गाजियाबाद के विभागों में सैकड़ों कागज धूल फांक रहे हैं और सूचना देने के नाम अफसर लोगों को चक्कर लगवा रहे हैं। पंचायत राज और विकास विभाग इस मामले में सबसे आगे हैं।

जन सूचना के तहत जवाब न देने में सबसे ज्यादा शिकायतें इन्हीं विभागों की आ रही हैं। उसमें भी ब्लाक दफ्तरों की हालत बहुत खराब है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए सीधे जवाबदेह खंड विकास अधिकारी कार्यालय ही हैं, मगर लोगों को बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी जरूरी सूचनाएं नहीं दी जा रहीं। पब्लिक विकास का हिसाब जनना चाहती है और ब्लाकों का स्टाफ यह सब बताने में हिचकता है।

जाहिर सी बात है, कहीं न कहीं दाल में काला है। लगातार मिल रहीं शिकायतों पर गंभीर रूख अपनाते हुए डीएम और सीडीओ ने सभी अफसरों को जन सूचना के मामलों को तुरंत निपटाने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी भी दी है कि जिन दफ्तरों में लोगों को बार-बार चक्कर लगवाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जएगी। जिला विकास अधिकारी वाईके उपाध्याय बताते हैं कि पंचायत राज के कुछ अफसरों और कर्मचारियों का इस तरह की लापरवाही को लेकर वेतन रोकने की कार्रवाई की जा रही है।

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