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दो टूक

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हम अंतरराष्ट्रीय स्तर की गगनचुंबी इमारतें बना रहे हैं। इंदिरापुरम और गाजियाबाद के दूसरे हिस्सों में वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का दावा है। खुद दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों के लिए संवर रही है। लेकिन फायदा क्या, जब बिजली ही नहीं? काया को सजने-संवारने से क्या होगा जब उसमें प्राण ही नहीं? बिजली किसी भी आधुनिक शहर का प्राण है। एनसीआर के जिस्म से यह प्राण दिन में दसियों घंटों तक अलग रहता है। बिजली कटौती जिंदगी का हिस्सा बन गई है। ऐसे में वर्ल्ड क्लास इन्फ्रासटकी बातें क्या जले पर नमक नहीं छिड़केंगी? बेवजह नहीं कि सोमवार को लोगों ने एक्सप्रेस वे जम कर दिया। तोड़फोड़ हुई। पुलिस कार्रवाई हुई। आज इन्हीं खबरों के बीच बिजली के दाम बढ़ने का समाचार भी पढ़ लीजिए। करेला और नीम चढ़ा वाली कहावत और किस दिन के लिए होती है?

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