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चोरों की सीनाजोरी

अपना ही माल तिड़ी हो गया और अरसे तक खुद को पता नहीं चल पाया। जब सामान बरामद हुआ, तब जानकारी हुई कि अपनी कृति के साथ ऐसा कृत्य हो गया।

मैं आदतन एक कबाड़ी की दुकान पर पुरानी मैगजींस तलाश रहा था। एक पत्रिका के चार साल पुराने अंक में मेरी कविता किसी और के नाम से प्रकाशित थी। तब जाना कि जिस माल को मैं अपनी धरोहर माने बैठा था, वह कब का उड़ाया जा चुका है। चोर भी ऐसा कि सबको दिखलाता घूम रहा था। मैं ही अंधा था। नहीं देख पाया था। मैंने उस पत्रिका के संपादक को शिकायती पत्र लिखा। वापस आ गया। उस शहर के एक कविनुमा मित्र को फोन किया। उन्होंने बताया, पत्रिका अनियतकालीन थी। कब की बंद हो चुकी। इन अनियतकालीन पत्रिकाओं की नियति ही यही है। इधर खुलती हैं, उधर बंद हो लेती हैं। वह थाना ही गुम हो गया था, जिसके हलके में यह वारदात हुई थी। मैं अपनी रपट भी लिखाता तो कहां लिखाता।

उस नेकनाम कवि को सर्च किया। वह साहित्यिक परिदृश्य से लापता मिला। हां, कुछेक आलोचकों ने उसके जैसे हुलिया के कई कवियों की जानकारियां दीं। शिनाख्त परेड के दौरान गली-गली से चोर कवि निकल आए। असली वाले की पहचान न हो सकी। उलटा वे सब मुझ पर ही हल्ला बोलने को ऑर्गेनाइज होने लग गए। घबराकर मैंने साहित्यिक कविताई त्याग दी। हास्य कविताएं लिखने लग गया।

अपने यहां हास्य को साहित्य मानने का चलन नहीं है। भले ही यह सीरियस लेखन कर्म से कठिन हो। सोचा, जिसे सब घटिया मानते हों, उसे कौन चुराएगा?

बहरहाल, चोर एक बार घर का रास्ता देख ले फिर लाख लॉक लगाओ, वह की-होल के रास्ते अंदर हो लेगा। पिछले दिनों एक चोर को पुनः सुअवसर प्राप्त हुआ। यह वाला लॉफ्टरिया ब्रांड था। पहले वाले में इतनी शरम तो थी कि उसने आज तक अपना फेस नहीं प्रदर्षित किया। यह तो साक्षात टीवी पर बेशर्मी उंडेल रहा था। इसने हास्य पर प्रथम उपकार करते हुए मेरी हास्य कविता और चुटकुले के बीच का भेद समाप्त कर डाला था। दूसरा एहसान यह किया था कि पद्य को गद्य में रूपांतरित कर दिया था। तीसरी कृपा के प्रसादस्वरूप वह गद्य स्वयमेव कैरीकेचर में ढल गया था। गोया पट्ठे ने सोने की अंगूठी चुराई। उसे गलाया। उसमें गिल्लट मिलाके चेन बनवाकर अपने गले में पहने था। मैंने दावा ठोकने की जगह अपना मत्था ठोक लिया।

इन लाफ्टर थीफ के डर से अब अपना हास्य कविता लिखना भी मुश्किल है। कविसम्मेलनों में मौलिक सुनाना उससे भी कठिन। हास्य कविता के उठाईगीरों पर शोध-प्रबंध लिखने के इच्छुक विद्वानों को बेस मैटीरियल चाहिए तो वे मुझ भुक्तभोगी से संपर्क करें।

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