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अच्छे-बुरे की पहचान है जनता को

देश की जनता ने विकास कार्यो को मद्देनजर जिस समझदारी का परिचय दिया है, वह तारीफ के काबिल है। सच मानो तो जनता ही भटके हुए राजनेताओं को सही रास्ते पर चलने को मजबूर कर सकती है। साबित हो चुका है कि जनता भद्दी व तीखी जुबान बोलने वाले नेताओं, दागियों, गुंडागर्दी करने व तोड़फोड़ मचाने वाले नेताओं से ऊब चुकी है। गुजरात का फॉमरूला भुनाने की मंशा लिए गद्दी का सपना देखने वाले नेताओं को मुंह की खानी पड़ी है। हार्दिक खुशी की बात तो यह है कि जनता अब बेवकूफ नहीं बन सकती। उनकी समझदारी पर फक्र है। वास्तव में देश की तरक्की कार्य करने से होता है, बोलने से नहीं?

अभिलाषा, नई दिल्ली

जहां चाह, वहां राह

तीसियों साल से श्रीलंका में प्रभाकरण के नेतृत्व में लिट्टे ने घमासान मचा रखा था। तमिलों के तथाकथित हितों की रक्षा के नाम पर लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण ने सत्तर हजर से ज्यादा लोगों का खून बहा दिया। और तो ओर उसने भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी कत्ल कराया। आतंक का पर्याय बन चुके प्रभाकरण ने श्रीलंकाई सेना की नाक में दम कर रखा था पर उसके खात्मे का सच्चे अर्थो में बीड़ा उठाया राष्ट्रपति राजपक्षे ने। हालांकि उसके लिए टेसुएं बहाने वाले भारतीयों की भी कमी नहीं किन्तु अंत में श्रीलंका की सेना ने प्रभाकरण का खात्मा करके ही दम लिया। नक्सलवाद से जूझ रहे भारत को यह एक सबक है। सरकार ठान ले तो कोई मुश्किल नहीं है कोई काम।

इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली

रेल सुविधा नहीं छीनें

सोलह वर्षो से रेल पटरी पर दौड़ रही ‘महानदी एक्सप्रेस’ को बंद करना अन्यायपूर्ण है। महानदी एक्सप्रेस विलासपुर से जम्मू तवी वाया रायपुर, नागपुर, भोपाल, दिल्ली प्रतिदिन चलाई जए, ताकि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश की धर्मप्राण जनता को मां वष्णो देवी के दुर्लभ दर्शन सुलभ हों तथा दिल्ली की ओर आने-जाने में रेल सुविधा भी बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ से जम्मू तवी सीधी रेल सुविधा नहीं है। किसी भी क्षेत्र से रेल सुविधा नहीं छीनी जनी चाहिए।

सेवक यादव, भोपाल

ऊपर से चलता भ्रष्टाचार

जनता ने लोकसभा सदस्यों को अच्छी प्रकार से सरकार चलाने हेतु चुना है जिन्हें इस कार्य के लिए सरकार से तमाम प्रकार के लाभ, भत्ते, सुविधाएं आदि मिलती हैं और बाद में आजीवन पेंशन। ऐसे में चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा मलाईदार मंत्रालयों की मांग उनके दुष्चरित्र को दर्शाती है, जो भ्रष्टाचार को आमंत्रित करती है। गलत तरीकों से अजिर्त धन या तो स्विस बैंकों में या सात पीढ़ी के लिए तमाम सम्पत्ति इकट्ठी करने में लगाते हैं। सच कहते हैं भ्रष्टाचार ऊपर से चलता है।
 
रामकृष्ण, द्वारका, नई दिल्ली

शर्म

छात्रों के पैंतीस प्रतिशत
रिजल्ट रहा, कई मरे।
पैंतीस प्रतिशत वोटिंग हुआ
नेता शर्म करें।
सवाल
टॉप के रिजल्ट पर
जहिर करते हर्ष।
क्या उन सबका
होता है उत्कर्ष।

गफूर खान, नानाखेड़ा, उज्जैन

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