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ब्लॉग की ताकत दिखाई अमिताभ बच्चन ने

ब्लॉग की ताकत दिखाई अमिताभ बच्चन ने

हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन अपनी अभिव्यक्ति के लिए आजकल जिस तरह ब्लॉग का नियमित रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि जाने माने शायर इलाहाबादी अपने मशहूर शेर ‘जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो’ की जगह ‘जब तोप मुकाबिल हो तो ब्लॉग निकालो’ ही लिख डालते।

अमिताभ बच्चन निश्चित रूप से एक ब्लॉगर के रूप में किसी ऐसे समाचार पत्र के संपादक की तरह अपनी आजादी का पूरा आनंद उठाते हैं जिसे अपनी पसंद के विषय पर कलम चलाने की पूरी छूट और आजादी है।

बात चाहे उनकी शूटिंग या दिनचर्या की हो या फिर पुत्र अभिषेक तथा पुत्रवधू ऐश्वर्या की। सवाल धोनी को भेजे गए एसएमएस का जवाब न मिलने का हो अथवा आस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी की ओर से दिए जाने वाले सम्मान को ठुकराने का। अब हर बात वह खुद अपने अंदाज में लोगों के सामने रखते हैं और इसमें कहीं किसी गलतफहमी की गुंजाइश भी नहीं होती ।

कभी मीडिया से खफा रहने वाले अमिताभ बच्चन के बारे में कहा जाता है कि 1975 से 85 तक उन्होंने समाचार माध्यमों से खुद को पूरी तरह अलग रखा। यह ऐसा समय था, जब फिल्म जगत में वह मध्यान्ह के सूर्य की तरह अपनी पूरी ऊर्जा के साथ धधक रहे थे।

बाद में कुछ समय के लिए राजनीति की दुनिया में प्रवेश के दौरान अमिताभ बच्चन ने अपने साक्षात्कार में कहा भी था कि उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है कि उनके करियर के श्रेष्ठ समय 1975 से 1985 का मीडिया के पास कोई रिकार्ड नहीं है, क्योंकि इस दौर में मीडिया ने भी एक तरह से उनका बहिष्कार किया।

अमिताभ बच्चन को निजता प्रिय है। यही वजह रही कि अनेक ऐसे प्रसंग सामने आए हैं जब खुद से जुड़ी बातों को लेकर मीडिया की प्रस्तुति उन्हें रास नहीं आई। मीडिया में भी यह असंतोष रहा कि अमिताभ बच्चन से जितना समय मिलना चाहिए वह उसे मिल नहीं पाता।

इसका रास्ता आखिरकार अमिताभ बच्चन ने ही तलाशा और उन्होंने आज के दौर के लोकप्रिय एवं सरल माध्यम ब्लॉग को अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में चुना। इसमें वह उन सारे विषयों पर भी अपनी राय जाहिर करते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के होते हैं। बात स्वाभाविक रूप से फिल्म जगत की ज्यादा होती है लेकिन सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर उनकी प्रतिक्रिया तत्काल सामने आती है।

अप्रत्यक्ष रूप से उनका यह ब्लॉग मीडिया के लिए राष्ट्रीय स्तर की किसी पार्टी का मुख्यालय बन गया है जहां हर रोज प्रेस ब्रीफिंग होती है। इलाहाबाद अमिताभ बच्चन का घर है और यही के एक नामचीन शायर मरहूम अकबर इलाहाबादी ने अपने एक मकबूल शेर में कहा था ‘खींचो न कमानो को न तलवार निकालो जब तोप मुकाबिल हो अखबार निकालो’। लेकिन आज के दौर में न सिर्फ अमिताभ बच्चन बल्कि कई अन्य हस्तियां भी कुछ इसी अंदाज में ब्लॉग निकाल रही ।

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