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पति क्यों छिपाते हैं बातें

पति क्यों छिपाते हैं बातें

‘तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुमने राजन को चालीस हजार रुपए उधार दिए हैं? कल उसकी पत्नी ने ही मुझे यह बताया। वह तो यह जानकर हैरान रह गई कि मुझे इस बात का पता तक नहीं है।’ मीता ने बहुत गुस्से से अपने पति मोहित से कहा। ‘इसमें बताने वाली बात क्या थी? दोस्ती में यह सब चलता है। और फिर अगर मैं तुम्हें बता देता तो क्या तुम मुझसे झगड़ती नहीं। वैसे ही तुम उससे चिढ़ती हो। फिर हमारा आपसी मामला है, इसमें तुम्हें पड़ने की कोई जरूरत नहीं है।’ झल्ला उठा था मोहित।

‘हद होती है किसी बात की। यह क्या तुम तो हर बात मुझसे छिपाते हो।’ ‘तो क्या करूं? तुम्हें हर बात बताकर मुसीबत मोल लेनी है। हर बात में किटकिट करती हो। बेकार ही घर में क्लेश हो जाता है। सुखी रहना है तो बातें छिपाना जरूरी हैं।’ केवल मीता की ही नहीं, अधिकांश पत्नियों की यह शिकायत होती है कि उनके पति उनसे बातें छिपाते हैं। बातें छिपाना क्या पुरुष का स्वभाव होता है या उनकी मानसिकता?


मनोचिकित्सक राजेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा कम बोलने की आदत होती है। वे व्यर्थ की बहस से बचना चाहते हैं। दूसरे उनके सोचने का ढंग स्त्रियों से बहुत अलग होता है। यही वजह है कि वे रिश्तों को ज्यादा संजीदगी से निभा पाते हैं। दो स्त्रियों में मतभेद बहुत जल्दी हो जाता है पर दो पुरुषों में बहस हो जाने पर भी उनके मन में कटुता नहीं आती है। घर से बाहर वह अनगिनत लोगों से मिलता है, हजारों चीजों को झेलता है। जरूरी तो नहीं हर बात आकर वह पत्नी को बताए ही। न बताना कहीं न कहीं पुरुषों के स्वभाव का हिस्सा भी होता है।’ समाजशास्त्री मानते हैं कि पति अक्सर इसलिए बातों को छिपाते हैं ताकि घर का माहौल खराब न हो क्योंकि औरतें जल्दी  तनावग्रस्त हो जाती हैं। उन्हें परेशानी से बचाने व घर में सुख-शांति कायम रखने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है। पुरुषों का समस्या सुलझने का ढंग अलग तरह का होता है, इसलिए वह कुछ बातों को अपने तक ही सीमित रखना चाहते हैं। वे यह भी नहीं चाहते कि बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाए।

कुछ स्वभाव व कुछ परिस्थितियां पुरुषों को बातें छिपाने के लिए मजबूर करती हैं पर इस पहलू का एक पक्ष और भी है कि पुरुष काफी हद तक कमिटमेंट करने से बचना चाहते हैं। कोई बात कहने के बाद अगर वह पूरी न हो तो रिश्तों में कड़वाहट आते देर नहीं लगती। आपसी समझ व विश्वास जिन पति-पत्नी में होता है वे भी चीजों को छुपाए जाने से बौखला जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हो रहा है। पत्नी इस धोखे को लेकर इतनी संवेदनशील हो जाती है कि वह पति पर बात-बात पर शक करने लगती है। इस तरह उनके बीच आपसी संवाद में भी कमी आ जाती है। फिर तो स्थिति यह आ जाती है कि बात का पता लगाने के लिए पत्नी अपने स्तर पर एक मुहिम ही छेड़ देती है।


दूसरों से वह पति के बारे में जानकारी लेने लगती है। उस पर नजर रखने लगती है और अपनी उत्सुकता के चलते जीवन की खुशियों को नजरअंदाज कर दांपत्य जीवन की सहजता खो देती है। यही नहीं सबसे बड़ी त्रासदी तो यह होती है कि इस तरह अपने पति के बारे में दूसरों से जानकारी लेते हुए वह स्वयं मजाक का पात्र बनती है। लोग तो यही मानते हैं कि उसमें ही कोई कमी होगी तभी तो उसका पति उससे बातें छिपाता है।

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