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फैसला आपका: क्योंकि जीवन है आपका

फैसला आपका: क्योंकि जीवन है आपका


सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगे भी काफी अरसा हो गया। बसों में सवारियां तो सवारियां, कंडक्टर, ड्राइवर तक धुएं के छल्ले उड़ाते मिल जाएंगे। कोई महिला हिम्मत कर मना करती भी है तो सवारियां मानो मौनव्रत पर हों। दरअसल तम्बाकू हमारे देश की सबसे भयावह स्वास्थ्यसमस्या है। हर साल करीब आठ लाख मौतों की वजह तम्बाकू है और दुनियाभर में सिगरेट पीने वालों में से 12 फीसदी हमारे देश में हैं। इस पर केवल रोक लगाने या चेतावनियां लिखने से ही बात बनने वाली नहीं लगती। अगर हम स्मोकिंग की ही बात करें तो यह युवाओं में सबसे तेजी से उभरती आदत है। पहले शौक होता है, फिर आदत बन जाती है। सिगरेट कंपनियां भी हमारे युवाओं को बखूबी अपना निशाना बना रही हैं, क्योंकि हमारी पचास फीसदी आबादी 24 वर्ष से कम उम्र की है। इसलिए यह उनके कारोबार का फोकस है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की जून 2008 में ‘एसोसिएशन बिटवीन टोबैको मार्केटिंग एंड यूज एमंग अर्बन यूथ इन इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक भारतीय बच्चों में धूम्रपान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और छह वर्ष की आयु के बच्चे तक सिगरेट-बीड़ी के सुट्टे खींच रहे हैं।

इनको क्या कहें..

जो नासमझ हैं वे क्षमा योग्य हैं। लेकिन जो जानते हैं, उनको क्या कहें? दिल्ली के एक नामी कॉलेज में तीसरे वर्ष की छात्रा रीना का कहना है कि मैं जानती हूं सिगरेट पीने से कैंसर होता है पर यह तब होता है जब आप लम्बे समय तक इसका सेवन करते हैं। मैं 50 साल की उम्र तक पहुँचने से पहले सिगरेट पीना छोड़ दूंगी। हालांकि रीना अभी उन्नीससाल की है पर वह पिछले दो सालों से सिगरेट का कश लगा रही है।

देर नहीं हुई, तुरंत छोड़ें

मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए.. ये सिर्फ नसीहत नहीं बल्कि हकीकत है। सामान्यत: पहले लोग शौक में सिगरेट पीते हैं और यही शौक उनकी आदत बनते देर नहीं लगती । उनका मनोबल कमजोर होने लगता है। सिगरेट नहीं मिली तो वह बैचेन हो उठते हैं, उनका दिमाग काम नहीं करता है। उनकी तलब उन्हें कश लगाने के लिए अंदर से प्रेरित करती है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेन्टर, दिल्ली के सलाहकार डॉ.आर.रंगा राव कहते हैं- जब जागे तभी सवेरा। 
इलाज के शुरुआती  चौबीस घंटे के अंदर ही आपको इसका सकारात्मक असर दिखने लगेगा। दो दिनों के बाद से आप अंदर से शांति महसूस करेंगे। बात यहीं खत्म नहीं होती, सिगरेट छोड़ने से दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम हो जाती है। आपका रक्तचाप सामान्य होता जाएगा। फेफड़े ठीक से काम करने लगेंगे। श्वास प्रक्रिया सामान्य होने लगेगी।


.. नहीं बन पाएंगी माँ

कई शोधों के मुताबिक जो महिलाएं धूम्रपान ज्यादा करती हैं उनकी माँ बनने की संभावना कम हो जाती है। अमेरिका में चिकित्सक धूम्रपान करने वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक का इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि चेन स्मोकर को गर्भनिरोधकों की कोई जरूरत  नहीं होती। साथ ही ऐसी महिलाओं में गर्भपात होने और प्रीम्च्योर बेबी होने की संभावना बहुत अधिक होती है। ऐसी महिलाएं सेक्स का आंनद भी कम उठा पाती हैं। कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि धूम्रपान करने का नुकसान महिलाओं को ज्यादा होता है। स्विट्जरलैंड के सेंट गैलन कैंटन अस्पताल में हुए एक शोध में कहा गया है कि महिलाएं भले ही धूम्रपान कम करती हों, लेकिन पुरुषों के मुकाबले उन्हें कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं युवावस्था से ही धूम्रपान करने से 35 वर्ष की उम्र तक आते-आते महिलाओं में हृदय रोग की दिक्कत बढ़ जती है। यही नहीं, सिगरेट का ज्यादा सेवन करने का असर माँ के दूध पर भी पड़ता है। ऐसे में अमृतप्राय यह दूध बच्चे के लिए नुकसानदायक हो जता है। इससे बच्चे को सांस में तकलीफ, अस्थमा, फेफड़ों की समस्या हो जाती हैं।
 
दूसरे का मजा, आपके लिए सजा
 
अगर आप सिगरेट पीते भी नहीं है, तो अप्रत्यशक्ष तौर से आप दिन में तीन से छह घंटे सिगरेट पी लेते हैं। ये बात हम नहीं कह रहे, कुछ दिनों पहले स्विट्जरलैंड में हुए एक शोध में ये बात सामने आई है। इस अध्ययन के मुताबिक पूरे विश्व में 68 प्रतिशत लोग ‘पैसिव स्मोकिंग’ करते हैं, यानी किसी दूसरे का पलभर का मजा, आपके लिए जिंदगी भर की सजा बन सकता है।

जल्दी हो जाएंगे बूढ़े
जितना ज्यादा आप सिगरेट पिएंगे, उतनी जल्दी ही बुढ़ापा आएगा। सिगरेट के कश उड़ाने  वाले पुरुषों और महिलाओं को आस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। धूम्रपान की वजह से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जती हैं।

हालांकि धूम्रपान के प्रति एक वर्ग का मोह भंग हुआ है और वे उसे त्याग चुके हैं मगर अभी भी एक बड़ा वर्ग धुएं की चपेट में है। मेल स्कूल ऑफ मेडीसन से जारी रिपोर्ट के अनुसार परोक्ष और अपरोक्ष रूप से पसरते धुएं के छल्ले महिलाओं को विशेष तौर पर रोगी बना रहे हैं। यहां के प्रोफेसरलेसली मेकोबसन का कहना है कि धूम्रपान युवाओं और महिलाओं में कैंसर जैसा गंभीर रोग भी सौंप रहा है। धुएं के हानिकारक तत्व एक महिला के जीवन को कम-से-कम दस वर्ष घटा रहे हैं। धूम्रपान के कारण महिलाओं के फेफड़ों में एडिनोवार्सिनोमा नामक कैंसर तेजी से पनपता है। परीक्षणोंमें पाया गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं जल्द धूम्रपान के कुप्रभाव की चपेट में आती हैं। लगातार धूम्रपान करने वालों का न केवल शरीर बल्कि घर का वातावरण और कपड़ों तक धुएं के प्रदूषणकारी तत्वों से प्रभावी हो जाते हैं। यह असहनीय गंध मेहमानों का बै

क्या कहते हैं आंकड़े

भारत में हर दिन धूम्रपान से 2,200लोग मरते हैं विश्व में 10,00
देश में कैंसर से मरने वाले 33 प्रतिशत लोग धूम्रपान से मरते हैं
धूम्रपान करने वाले 14 फीसदी लोगों में सांस संबंधी शिकायतें
भारत में ध्रूम्रपाकी शुरुआती  उम्र 20
कैंसर की शिकार महिलाओं की उम्र तकरीबन 40-65 के बीच
उत्तरपूर्वी राज्यों में धूम्रपान में महिलाएं सबसे आगे

औरतों के लिए खतरनाक क्यों

महिलाओं में फेफड़े के कैंसर की 25 प्रतिशत ज्यादा आशंका
दिल का दौरा पुरुषों की अपेक्षा 16-19 साल पहले पड़ता है
प्रीमच्योर बच्चे का जन्म ,गर्भपात भी कराना पड़ सकता है

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  • Web Title:हर कश में मौत