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आडवाणी बने रहेंगे विपक्ष के नेता

आडवाणी की तमाम ना-नुकुर के बावजूद आखिरकार भाजपा संसदीय दल की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी को पुन संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। अब 15वीं लोकसभा में वे प्रतिपक्ष के नेता बने रहेंगे। नेता चुने जाने के बाद आडवाणी ने कहा कि आम चुनावों में हार के कारणों की आत्म समीक्षा करनी होगी तथा किसी भी पहलू की उपेक्षा नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि इस हार से पार्टी हतोत्साहित नहीं है।

आडवाणी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद संसदीय दल के नेता के पद से इस्तीफा देने की पेशकस की थी। लेकिन पार्टी नेताओं के दबाव में उन्होंने अपना इरादा टाल दिया था। इस मुद्दे पर पार्टी संसदीय दल की बैठक हुई। इसमें लोकसभा के 116 तथा राज्यसभा के 47 सांसदों ने भाग लिया।

आडवाणी को सहमति से दल का नेता चुना गया। अपने स्पीच में आडवाणी पीएम इन वेटिंग रह जाने का दर्द नहीं छुपा पाए। उन्होंने कहा कि हमारी उम्मीदों और समर्थन के आधार को देखते हुए जो परिणाम आए हैं, वे बेहद निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड तथा उड़ीसा में पार्टी की परफारमेंस खराब क्यों रही है, इसका पता लगाया जाएगा।

बैठक में लोकसभा में संसदीय दल के उप नेता के तौर पर सुषमा स्वराज और राज्यसभा में पार्टी नेता के रूप में वंकेया नायडू के नामों पर भी चर्चा हुई। लेकिन इस बार में फैसला नहीं हुआ तथा फैसला लियाग या कि जल्द आडवाणी इन पदों की घोषणा करेंगे।

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