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संबंधों को समझौतों से तर करेंगे सरकोजी

्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की शुक्रवार से शुरू हो रही पहली भारत यात्रा नागरिक परमाणु ऊर्जा और रक्षा एवं व्यापार के क्षेत्र में सहयोग तथा अहम क्षेत्रीय मुद्दों पर कंेद्रित रहेगी। सरकोजी दो दिन की यात्रा के दौरान गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। सूत्रों के अनुसार नागरिक परमाणु क्षेत्र में सहयोग के लिए फ्रांस और भारत के बीच समझौते का प्रारूप तैयार हो गया है, लेकिन इस पर अंतिम मुहर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में भारत केंद्रित सुरक्षा उपायों को अंतिम रूप मिलने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह देशों द्वारा भारत को विशेष दर्जा दिए जाने के बाद ही लगेगी। सरकोजी की यात्रा के दौरान प्रस्तावित परमाणु समझौते की शेष औपचारिकताएं पूरी होगीं। वर्ष 1में जब भारत ने पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था उसी समय फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था में भारत को विशेष दर्जा देने की वकालत की थी। रणनीतिक साझेदारी के लिए दोनों देशों के बीच रक्षा करार पर भी हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। भारत द्वारा पहले से इस्तेमाल किए जा रहे सैन्य साजो-सामान को उन्नत बनाने के लिए रक्षा समझौता हो सकता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की मजबूती के लिए फ्रांस की आेर से कुछ क्षेत्रों में निवेश की घोषणा किए जाने की संभावना है। दोनों देशों के व्यापार से जुड़े प्रतिनिधियों के सम्मेलन की समाप्ति पर फ्रांसीसी कंपनियों की आेर से निवेश की खासकर जलसंसाधन और शहरी विकास के क्षेत्र में निवेश की घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताआें के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग तथा सूचनाआें को साझा करने पर भी सहमति बन सकती है। दोनों पक्ष अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु ऊर्जा और सैन्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सूचनाआें के आदान-प्रदान और प्रौद्योगिकी को साझा करने पर सहमत हो सकते हैं। इस दौरान फ्रांस भारत से जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए प्रयास और तेज करने को कह सकता है। भारत की दलील है कि जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों को उपाय करने चाहिए तथा विकासशील देशों को फिलहाल इस जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाना चाहिए क्योंकि जहरीली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बंद करने में लगने वाले संसाधनों से उनका आर्थिक विकास बाधित होगा। लेकिन फ्रांस का नजरिया इस मामले में भारत से अलग है। वह भारत से विकास प्रक्रिया के साथ-साथ कार्बन डाईआक्साइड के उत्सर्जन पर रोक लगाने को कह सकता है। भारत और फ्रांस के छात्रों को एकदूसरे के यहां अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच समझौता होने के आसार हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सरकोजी फ्रांस सरकार के उस फैसले की घोषणा कर सकते हैं जिसमें विदेशी छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ आंशिक काम करने की भी अनुमति मिल सकेगी ताकि वे पढ़ाई के साथ अपना खर्च भी निकाल सकें। फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी के समर्थन को दोहरा सकता है। इसके अलावा तंत्रिकातंत्र विज्ञान, नैनो तकनीक और आर्गेनिक केमेस्ट्री पर विज्ञान के क्षेत्र में कुछ समझौता हो सकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात में सरकोजी वलंत क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं जिनमें पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया, ईरान का परमाणु मसला, पाकिस्तान के साथ संबंध तथा दक्षिण अप्रीका में द्विपक्षीय सहयोग मुख्य हैं। सरकोजी का राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी, कांग्रेस एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की प्रमुख सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात का कार्यक्रम है। सरकोजी के साथ भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल आ रहा है जिनमें विधि, विदेश मामलों और मानवाधिकार, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के मंत्रियों समेत छह मंत्री, छह सांसद, 50 से भी यादा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। सरकोजी के साथ उनकी प्रेमिका कार्ला ब्रूनी के आने की अटकलों पर सूत्रों ने कहा कि इस तरह की घोषणाएं अंत समय में की जाती हैं। पिछले एक दशक में सरकोजी भारत की यात्रा पर आने वाले दूसरे फ्रांसीसी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले 1में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति याक शिराक भारत आए थे।

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