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बैंकिंग महाघोटाला तो होना ही था फ्रांस में

्रांस में हुए 7.15 अरब डॉलर (28,600 करोड़ रुपये) के बैंकिंग महाघोटाले से फ्रांसीसी काफी हैरान हैं। लेकिन जिस इंसान के नक्शे कदम पर चलकर इसे अंजाम दिया गया, वह कतई भी चकित नहीं है। निक लीसन नामक इस घोटालेबाज के मुताबिक यह तो होना ही था। दूसरी तरफ, फ्रांस के सोसाइटी जनरल बैंक के शेयरों की खरीद-फरोख्त पर लगा प्रतिबंध गुरुवार को हटा लिया गया। हालांकि, इसके शेयर खुलते ही 3.64 फसीदी गिर पड़े। बैंक ने स्वीकारा है कि उसके एक जूनियर ट्रेडर जर्मी कार्वलि ने 4.अरब यूरो की भारी हेराफेरी की है। यह दुनिया के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। निक का कहना है कि,‘इस बात का खतरा तो हमेशा से ही था। वैसे आपको शायद भरोसा नहीं हो, लेकिन मैं अपनी बीवी के साथ पेरिस में छुट्टियां मानने के लिए जाने वाला हूं। अजीब संयोग है न।’ निक 1में ब्रिटेन के सबसे पुराने वित्तीय संस्थान बैरिंग्स बैंक की सिंगापुर ब्रांच में बतौर ट्रेडर तैनात था। इस दौरान पता चला कि उसके कारण बैंक को 1.5 अरब डॉलर (7,500 करोड़ रुपये) का नुकसान पहुंचा। इतना बड़ा घाटा बैंरिग्स झेल नहीं पाया और उसका दीवाला निकल गया।ड्ढr बाद में, आईएनजी ने इसे केवल एक पाउंड में खरीद लिया था। घोटाले का पता चलने पर निक फरार हो गया था, लेकिन बाद में उसे पकड़ कर वापस सिंगापुर भेज दिया गया। सिंगापुर की एक अदालत ने उसे चार साल की कैद की सजा सुनाई थी। सजा पूरी करने के बाद उसने ‘रोग ट्रेडर’ के नाम से एक किताब भी लिखी थी। यह खूब बिकी। बाद में, इस पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बनाई गई थी। इस वक्त वह आयरलैंड में एक फुटबॉल क्लब का प्रमुख है। वैसे, विश्लेषक मानते हैं सोसाइटी जनरल बैंक के मामला निक के मामले से थोड़ा अलग है। सीटीग्रुप के पूर्व एमडी पीटर हान का कहना है कि,‘निक अपना बॉस खुद ही था। ऐसा आज की तारिख में कम ही होता है। कार्विल के मामले में हुआ यह है कि वह बैक ऑफिस से आया है। इसलिए उसे पूरे मामले से बच निकलने का रास्ता पता था।’

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