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कला महाविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ित प्रक्रिया शीघ्र

ैनवास पर आरी-तिरक्षी रेखाओं व बेजान मिट्टी को आकार देकर सामाजिक विषमताओं की तल्ख सच्चाइयां कह देना आसान नहीं है। कला व शिल्प महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के जरिए समसामयिक बातों पर अपनी एक अलग राय जाहिर कर दी है। किस तरह गांव-घर में स्कूलों में बच्चे पढ़ते हैं। बेटी को लक्ष्मी कहते हैं पर भ्रूण हत्या से परहेज नहीं करते। मानव व प्रकृति के बीच के रिश्ते। बरसात के दिनों में निर्धन व्यक्ित किस तरह बेबस दिखता है। कंडोम के भीतर एक नन्हा शिशु, नन्ही पैदाइशी देवी, घरेलू बर्तनों को सजाकर बना रोबोट मैन। साथ ही इस सालाना जश्न के मौके पर छात्र-छात्राओं ने खूब धमाल भी किया। कला व शिल्प महाविद्यालय के 6वें स्थापना दिवस पर लगे कलाकृति मेले मंे विद्यार्थियों की सोच व कल्पना कागज के कैनवास व मूर्तियों में सहज ही दिखती है।ड्ढr ड्ढr वित्त विभाग के प्रधान सचिव नवीन कुमार ने कैनवास पर एक रंग-बिरंगी छतरी बनाकर कालेज के तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया। प्राचार्य अनुनय चौबे ने कहा कि जल्द ही स्थायी शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जिससे पठन-पाठन कार्य सुचारू हो सकेगा। इस मौके पर प्रो. दिनेश दिवाकर समेत सभी प्राध्यापक व कर्मचारी भी मौजूद थे। कालेज में फिलहाल एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। प्राचार्य समेत कुल 12 शिक्षकों के स्थायी पद हैं पर डेलीवेजेज पर नौ अस्थायी शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। तृतीय वर्ष के अभिषेक, प्रीतम, इम्तियाज हुसैन, प्रीति, अभिषेक आनन्द, मधुमिता, प्रथम वर्ष की ज्योत्सना, बेबी रिचा, दीपिका, खुशी, मनीष, अंशिका, रश्मि, शिप्रा,मुकेश, पिंटू प्रसाद, अनूप, दीपांकर, अभिजीत,आशा रानी पांडा, विद्या,खुशबू आदि की कलाकृतियां कुछ न कुछ कहती दिखीं। इनमें से करीब चालीस छात्र-छात्राओं को समारोह के अंतिम दिन पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कृत किए जाने वाले विद्यार्थियों के नामों की घोषणा कर दी गयी है। जिसमें रीतेश, पंकज, चंद्रकांता, राकेश, अनीश,दीपशिखा,आलोक,चंदन सौरभ,मनोज विश्वास, अनीता, संतोष, रंजीता, अनीमेष, गोपाल, रश्मि, रूपम,जीतेन्द्र, जयकिशोर, विजयराज, माया, कृष्णा, अभिषेक, डेजी, रानी, हेमंत, सुनील, सौरभ आदि शामिल हैं।ड्ढr ड्ढr केवल इमारत से कोई नहीं बन सकता केंद्रीय विश्वविद्यालयड्ढr पटना (हि.प्र.)। केवल इमारत से कोई विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं बन जाता है। अगर उसमें शैक्षणिक कैलेंडर सही है। वहां के फैकल्टी मेम्बरों में विद्वान लोग हैं, तो फिर उसे केंद्रीय विवि का दर्जा पाने से कोई नहीं रोक सकता है। यह कहना है पटना विवि के नए कुलपति प्रो. श्याम लाल का। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि अभी मैं यहां की स्थिति का अध्ययन करूंगा और उसके बाद ही कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए योजना बनायी जाएगी। प्रो. श्याम लाल ने कहा कि हमारा मुख्य मकसद है छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में बेहतर माहौल तैयार करना। उन्होंने कहा कि अगर पहले से पटना विवि को केंद्रीय विवि बनाने की बात चल रही है, तो मैं उसको आगे बढ़ाऊंगा। केंद्रीय विवि के लिए एक कैंपस बनाने के सवाल पर उन्हांेने कहा कि किसी भी कॉलेज को बेहतर वहां की आधारभूत संरचनाएं बनाती है, न कि कैंपस या भवन। हमें सबसे पहले कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर के आधार पर ही परीक्षा ली जाएगी और परीक्षाफल का प्रकाशन कराया जाएगा। छात्रों को साथ लेकर ही विवि का विकास संभव है और इसलिए हम उन्हें पूरा समय देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार में टैलेंट की कमी नहीं है, बस शिक्षकों को उन्हें सही दिशा देनी है और इसमें हमें बेहतर प्रयास करना होगा।

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