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भारत-वेनेजुएला केचच बीच खुले संभावनाओं के नए द्वार

पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती घरलू जरूरतें सरकार के लिए चिंता की एक बड़ी वजह रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने सरकार के माथे की इस शिकन को और भी बढ़ा दिया है। इस हालत से निजात पाने के लिए भारत दुनिया भर में तेल समृद्ध देशों से गठबंधन कर रहा है। इसी सिलसिले में भारत ने वेनेजुएला के साथ एक सामरिक गठबंधन किया है । भारत ने वेनेजुएला के सान क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र को विकसित करने के लिए एक समझौता किया है जिसके तहत भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) लगभग 1400 करोड़ रुपये का निवेश करगीपेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनी ओवीएल और वेनेजुएला की कंपनी पेट्रोलियोस डि वेनेजुएला एस ए (पीडीवीएसए) के इस संयुक्त उद्यम में भारतीय कंपनी का योगदान लगभग 40 प्रतिशत का रहेगा। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा और वेनेजुएला के ऊर्जा मंत्री राफेल रमीरेज कोरेनो की मौजूदगी में ओवीएल के प्रबंध निदेशक आर एस बुटोला और पीडीवीएसए के अध्यक्ष युडो यू डेलपीनो ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। ये दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से फील्ड की मौजूदा 20 हाार बीबीएल प्रति दिन क्षमता को बढ़ाकर 40 हाार बीबीएल करने के लिए कार्य करंगी। श्री देवड़ा ने इस समझौते को हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में भारत और वेनेजुएला के बीच बढ़ते संबंधों की दिशा में मील का पत्थर बताया। गौरतलब है कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में एक है जिसके पास 87 अरब बैरल से भी अधिक का तेल भंडार मौजूद है। इसके अतिरिक्त, इसके पास विशाल मात्रा में गैर-पारंपरिक तेल डिपोजिट (हैवी वायल) भी है। इनमें से ज्यादातर डिपोजिट ओरिनोको आयल बेल्ट में स्थित हैं। सैन क्रिस्टोबाल परियोजना में ओवीएल की भागीदारी से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के लिए और अधिक अवसर खुलने की उम्मीद है। ओवीएल ने पीडीवीएसए सीवीपी के साथ संयुक्त अनुसंधान तथा प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए एक प्रौद्योगिकी सहयोग समझौता भी किया है।

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  • Web Title: भारत-वेनेजुएला केचच बीच संभावनाओं के द्वार