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10 लाख में 11 हचाार टन आलू खरीदेंगे!

आलू की सरकारी खरीद के नाम पर किसानों के साथ मखौल हो रहा है। 11 हाार टन आलू खरीदने के लिए शासन से मात्र दस लाख रुपए जारी किए हैं। उधर किसान सरकारी खरीद केंद्र की ओर रुख नहीं कर रहा क्योंकि सरकारी रट खुले बाजार से सौ रुपए कम हैं। अब लखनऊ से आकर मंडी में घूम-घूम कर बोहनी की जुगत में लगे अफसरों ने गाँव-गाँव खरीद का फैसला लिया है। मगर किसान के मानने की उम्मीद कम है। रट कम होने के साथ वह ग्रेडिंग की बात पर भी क्षुब्ध है। सातनपुर स्थित खरीद केंद्र पर लखनऊ से आए कृष्ण मोहन चौधरी कंट्रोल रूम अधिकारी के रूप में जमे हैं। सहायक प्रबंधक विपणन नरंद्र सिंह व विपणन अधिकारी संतोष कुमार द्विवेदी किसान भवन मंडी परिसर में काँटा-बाँट लिए बैठे हैं। लेकिन एक भी किसान उस तरफ रुख नहीं कर रहा।ड्ढr आलू खरीद के लिए आए कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया कि आलू क्रय के लिए शासन ने दस लाख रुपए जारी किए हैं। तीन हाार मीट्रिक टन आलू हैपेड द्वारा खरीदा जाएगा और 8000 मीट्रिक टन आलू पीसीएफ ने खरीदने का ऐलान किया है। इस आलू को खरीदने के लिए 30 अप्रैल तक की तिथि निर्धारित की गई है। किसान देवेंद्र सिंह, धर्मेद्र सिंह व अमर सिंह का कहना है कि जिस तरह से सरकारी क्रय केंद्रों पर ग्रेिडग की जाएगी, उससे से 12 एमएम और 12 से 25 एमएम का आलू पूरी तरह से बरबाद हो जाएगा। एक कुंतल में माल की छँटाई पर 35 से 45 एमए का आलू बमुश्किल 25 किलो ही निकलेगा। चार कुंतल आलू खराब करने के बाद किसानों को एक कुंतल आलू के 250 रुपए दाम मिल सकेंगे। तीन कुंतल र्छी व मझोला कहाँ फेंका जाएगा? जवाब अधिकारियों के पास नहीं है। इस बीच जब बाजार में आलू की कीमत 325 रुपए से 350 रुपए तक चल रही है, किसान अपना माल सरकार को क्यों देगा। किसान मुन्नू सिंह ने कहा कि यह तो किसानों के साथ मखौल है।ं

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