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संस्कृत स्कूलों के विज्ञान शिक्षकों का वेतन फिर लटका

राज्य सरकार के लाख प्रयास के बावजूद संस्कृत स्कूलों में कार्यरत विज्ञान शिक्षकों के वेतन भुगतान का मामला एक बार फिर लटक गया। इस मद की राशि वापस करने के बाद अब केन्द्र ने एक नया ‘पेंच’ फंसा दिया है। उसका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा लौटाई गई राशि में 46 हाार रुपये कम हैं। जानकारी के अनुसार केन्द्र ने वापस राशि पर सूद की भी मांग की है।ड्ढr ड्ढr पूरी राशि लौटाने के बाद ही नया आवंटन दिया जाएगा। अब राज्य सरकार के अधिकारी केन्द्र के इस नए ‘पेंच’ से निकलने का रास्ता तलाशने में जुटे हैं। केन्द्र का यह पत्र राज्य सरकार को कल ही प्राप्त हुआ है। विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह के अनुसार अभी उक्त पत्र की जानकारी उनतक नहीं पहुंची है।ड्ढr ड्ढr माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बताया कि राशि अगर कम है तो वह पूरी की जा सकती है लेकिन सूद देने का सवाल ही नहीं है। संस्कृत विद्यालयों के आधुनिकीकरण के तहत बहाल हुए इन विज्ञान शिक्षकों के वेतन सात वर्षों से सिर्फ इसलिए लंबित हैं कि इस मद में केन्द्र द्वारा भेजी गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजा जा सका। केन्द्र सरकार द्वारा इन शिक्षकों के वेतन मद में 86 लाख रुपये भेजे गए थे। वित्तीय वर्ष 1000 में लगभग 25 लाख 26 हजार रुपये वेतन पर खर्च किए गए। शेष लगभग 60 लाख 57 हजार रुपयों को संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने खाते में जमा कर दिया। बाद में एक मामले को लेकर भविष्य निधि कार्यालय ने उक्त खाते को सील कर दिया। नतीजतन उक्त राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजा जा सका। वर्तमान मंत्री वृशिण पटेल ने मामले को गंभीरता से लिया और तकनीकी अड़चनों को दूर कर शिक्षकों के भुगतान का आदेश दिया। निर्देश के बाद अधिकारियों ने राशि वापस कर नया आवंटन प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन अब केन्द्र के नये पेंच से यह मामला एक बार फिर अधर में है।

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