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आईसीडीएस : और कमजोर हो गये बच्चे

पिछले दस वर्षो से चल रही समेकित बाल विकास परियोजना का लाभ समाज के अभिवंचित वर्ग (अजा, जनजाति, अल्पसंख्यकों) तक नहीं पहुँच सका। इस वर्ग के बच्चे पहले की तुलना में और कुपोषित और एनिमिक हो गये। इसका खुलासा विश्व बैंक की र्पिोट से हुआ है। इससे निबटने के लिए विश्व बैंक ने यूनिसेफ के सहयोग से आईसीडीएस-4 का गठन किया है ।ड्ढr ड्ढr सरकार देश के आठ राज्यों सहित राज्यभर के 1जिलों में बच्चों को आईसीडीएस-4 के जरिये कुपोषण से मुक्ति दिलाएगी। प्रोजेक्ट में खास तौर पर अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्य समुदाय की माँ-बच्चों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए विशेष योजनाएं बनाई गयी है। आईसीडीएस-4 के तहत प्रखंडों में जहां-ाहां अनुसूचित जाति,ानजाति और अल्पसंख्यकों बहुल इलाके हैं, वहां प्राथमिकता के साथ आंगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण किया जाएगा। विश्व बैंक की र्पिोट के मुताबिक वर्ष और 2005-06 में 6 माह से 35 माह तक बच्चों में एनिमिया के प्रतिशत का अनुपात जहां 74.2 था, वह बढ॥कर 7हो गया है। वहीं 23 प्रतिशत बच्चों का वजन आयु से कम है। लिहाजा पिछले 10 वर्षो से से चल रहे आईसीडीएस प्रोजेक्ट अजा,ानजाति, अल्पसंख्यकों वर्ग की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। जिला कार्यक्रम अधिकारी हरन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि यह परियोजना जुलाई से सभी प्रखंडों में शुरू की जाएगी, जो अगले पांच साल तक जारी रहेगी। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के विकास के लिए माता-पिता दोनों का शामिल किया गया है। अब आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक निश्चित दिन को माता और शिशु दिवस मनाया जाएगा। वहीं वंचित वर्ग के लोगों को लोककला और मास कम्यूनिकेशन से जानकारी दी जाएगी। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों पर छह माह पूरा करनेवाले हर बच्चे का जन्मदिन, गोदभराई जसे समारोह का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक केन्द्र पर मां अैार शिशु सुरक्षा कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें हर महीने की प्रगति लिखी जाएगी।ं

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