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़स्नस्नखस्नस्नज्ञ्स्नएस्नद्ग ञ्फद्ग िस्ऩस्नञ्फलस्नछस्नंस्नस्न ञ्फस्न ष्टक—स्नस्नस्क मायावती की चमकबसपा का उभार दोनों बरकरार !

उपचुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि मायावती की सोशल इंजीनियरिंग और चमकी है और दलित वोटों पर उनका दबदबा कायम रहा है। बसपा को पाँचों सीट पर मिली जीत ग्यारह महीने पहले विधानसभा चुनाव में मिली जीत का विस्तार है।ड्ढr बसपा के लिए उपचुनाव खासी अहमियत थी। बलिया की हार के बाद कहा जा रहा था कि मायावती की सोशल इंजीनियरिंग फेल हो गई लेकिन खलीलाबाद से लेकर बिलग्राम और फिर कर्नेलगंज तक बसपा की जीत ने साबित कर दिया कि सर्वसमाज में पार्टी का दायरा पहले की अपेक्षा और बढ़ा है। खलीलाबाद में पार्टी प्रत्याशी कुशल तिवारी इससे पहले सपा और भाजपा के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके थे लेकिन जीत का सेहरा बसपा में ही बँध पाया। आजमगढ़ में बसपा प्रत्याशी अकबर अहमद डम्पी की जीत ने विरोधी दलों के उन दावों को खारिज कर दिया कि मुसलमानों ने बसपा से किनारा कर लिया है। दोनों लोकसभा और मुरादनगर छोड़कर दोनों विधानसभा सीटों पर मुसलमानों को ‘हाथी’ से जोड़े रखने में काबीना मंत्री नसीमुद्दीन की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी तरह सरकार से टिकैत की तनातनी के बाद पश्चिम की मुरादनगर सीट पर इसका असर पड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। विरोधी दलों का दावा था कि जाट-जाटव और मुसलमान के गठजोड़ के जरिए आम चुनाव में बसपा ने पश्चिम में रालोद का सफाया किया था, वह खत्म हो गया है लेकिन नतीजे ने टिकैत फैक्टर को बेमानी साबित कर दिया था।

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