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क्षमा का संतोष

पंद्रह साल पहले मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में सिस्टर रानी मारिया की हत्या कर दी गई। वे गरीबों के सशक्ितकरण में काफी सफल रही थीं। सिस्टर रानी मारिया रात-दिन गरीबों की सेवा में लगी रहती थी। सादा जीवन और दूसरों की भलाई में वह हमेशा तत्पर रहती। रानी मारिया के हत्यार समुन्दर सिंह को उम्र कैद की सजा भी हो गई। अपनी बड़ी बहन की हत्या से विचलित सिस्टर सेल्मी ने जब इस सदमें से उबरने की कोशिश की तो यह सोचकर उसका मन भारी हो उठा कि कोई और भी है जो जेल की सलाखों के पीछे उसी हत्या का दुख झेल रहा है। बस सिस्टर सेल्मी ने जेल में समुन्दर सिंह से मुलाकात की और उसे ये समझाने की कोशिश की कि उनके परिवार के सभी सदस्यों ने उसे क्षमा कर दिया है। पर समुन्दर सिंह इस पर विश्वास करने को तैयार नहीं था। सेल्मी सोचने लगी कि कैसे विश्वास दिलाया जाए। उन्हीं दिनों राखी का त्योहार पड़ा। सब अपने भाई-बहनों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाने में लगे थे। सिस्टर सेल्मी अलग से एक राखी ले कर निकल पड़ी। सलाखों के पीछे से जब समुन्दर सिंह बाहर निकला तो सेल्मी ने अपने बहन के हत्यार की कलाई पर राखी बांध दी। समुंदर सिंह ने कहा, ‘मैंने तो कभी किसी से कोई माफी नहीं मांगी है। लेकिन वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सका और दोनों राखी बांध कर भाई-बहन बनने वाले गले-गले सिले और एक दूसर को गले लगा कर रोने लगे। सिर्फ सेल्मी ही नहीं, उसकी मां इलिजाबेथ ने भी समुन्दर को तभी माफ कर दिया था, जब उन्होंने उससे मिलकर उसके हाथ ये कहकर चूमे थे कि उसके हाथों में उन्हें अपनी बेटी के खून की एक अनोखी गंध मिलेगी। और कुछ दिनों के बाद जब इलिजाबेथ अपनी बेटी रानी मारिया की कब्र देखने आईं तब वे इन्दौर जेल में समुन्दर सिंह से भी मिलीं। यह अनोखी मुलाकात देखकर जेल के अधिकारियों तक की आंखें नम हो गईं। क्या ऐसा ही कुछ प्रियंका गांधी और नलिनी श्रीहरन के मिलन के समय हुआ?

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  • Web Title: क्षमा का संतोष