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राकेश को भाया स्वीडन का स्कूल

वीडन में आयोजित विश्व बाल पुरस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व कर सरहसा का राकेश स्वदेश लौट आया है। अपने दस दिनों की यात्रा के दौरान उसने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनके सामने भारत में उपेक्षित बच्चों की व्यथा रखी। राकेश वहां हर साल आयोजित होने वाले विश्व बाल पुरस्कार समारोह में लगातार दूसरी बार शिरकत कर रहा था। इस साल वह जूरी के सदस्य की हैसियत से वहां गया था। उसने पुरस्कार के लिए कंबोडिया की लड़की का चयन किया।ड्ढr ड्ढr यात्रा के दौरान वह स्वीडन के प्राथमिक स्कूल भी गया और वहां की शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जो उसे बहुत पसंद आया। आखिर उसे अपने दोस्तों को भी तो वहां के स्कूलों के बार में बताना था। सहरसा के घीना गांव का राकेश गांव में ही बकरी चराता था। इसी दौरान गांव के दलाल रामचंद्र सदा ने उसे लड्डू खिलाकर बेहोश कर दिया और उसे पंजाब में दलबार सिंह को बेच दिया था। देखते ही देखते वह एक हाथ से दूसर, दूसर से तीसर, चौथे हाथों में बिकता रहा। इसी दौरान बचपन बचाओ आन्दोलन के प्रयासों से उसे बंधुआ मजदूरी से मुक्ति मिली। आज वह सशक्त है। बेबस बच्चों को अधिकार दिलाने, उनका बचपन लौटाने की लगातार कोशिश कर रहा है। राकेश ने बताया कि स्वीडन में बच्चों को स्कूल में ही कुकिंग, वेल्डिंग, कारपेंट्री, टेलरिंग, पेंटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है।

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  • Web Title: राकेश को भाया स्वीडन का स्कूल