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सिर्फ अनुशंसा करने वाली संस्था बनी

सूबे को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पर्यावरण एवं वन विभाग ने कई स्तरों पर कार्रवाई आरंभ की है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उत्तरदायी बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद इस बात को लेकर परशान है कि सरकारी विभाग उसके निर्देशों पर कार्रवाई नहीं करते हैं। पर्षद सिर्फ अनुशंसा करने वाली संस्था बनकर रह गयी है। पटना शहर में 15 वर्षो से ज्यादा दिनों से चल रहे वाहनों के हटाने का निर्देश परिवहन विभाग के स्तर पर लम्बित है। पॉलीथिन से मुक्ित के लिए सड़क निर्माण में पॉलीथिन को शामिल करने की अनुशंसा पथ निर्माण विभाग को की जा रही है। तीन महीने में सभी गाड़ियों की एक बार प्रदूषण जांच करवाने की पर्षद की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है।ड्ढr ड्ढr पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रधान सचिव शिशिर सिन्हा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद स्वायत्तशासी निकाय है और अपने सीमित संसाधनों में बढ़िया काम कर रहा है। हालांकि उन्हीं के समक्ष पर्षद के अध्यक्ष परशुराम राम ने स्वीकार किया कि उसकी अनुशंसाओं का क्रियान्वयन नहीं होता। बावजूद प्रदूषण नियंत्रण पर्षद गंभीर कार्रवाई कर रहा है। नदियों के जल की गुणवत्ता का अनुश्रवण किया जा रहा है। जीव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 188अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है।ड्ढr ड्ढr पटना को वायु प्रदूषण से मुक्त करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनायी गई है। पीएमसीएच के सहयोग से पर्यावरणीय स्वास्थ्य अध्ययन किया जा रहा है। पर्यावरण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उद्योगों की स्थापना के लिए जोनिंग एटलस का निर्माण जारी है। 7विद्यालयों में ईको क्लब बनाये गये हैं।ं

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