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लीजिए आईआरएस ने भी माना अब हिन्दुस्तान की बारी है

कोई शक नहीं, कोई बहस नहीं। इंडियन रीडरशिप सव्रे (आईआरएस) का ताजातरीन राउंड बताता है कि अक्टूबर, 2007 में जारी हुए राउंड के बाद से किसी भी और अखबार के मुकाबले हिन्दुस्तान ने सबसे ज्यादा पाठकों को अपने साथ जोड़ा है। आज हिन्दुस्तान के साथ आगे बढ़ रहे पाठकों की संख्या 87 लाख 50 हाार है। इस पीरियड में पूर दो लाख पाठकों की बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं आज यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा अखबार बन गया है। इसने मलयालम मनोरमा को पीछे छोड़ते हुए यह गद्दी हासिल की है। हर उस राज्य ने हिन्दुस्तान को सराहा है, जहां इसकी मौजूदगी है। डालते हैं, इसकी सिलसिलेवार प्रगति पर एक सरसरी नजर। बिहार का गढ़ लगातार दृढ़ बिहार में हिन्दुस्तान की पकड़ आज भी पहले जसी मजबूत है। यहां के बाजार का 73 फीसदी हिस्सा इसी अखबार की झोली में है। फिलवक्त हमार साथ यहां के 44 लाख पाठक जुड़े हैं।ड्ढr झारखंड में भी नंबर वनड्ढr हम झारखंड में भी पहले नंबर वन थे। इस बार के सव्रे में हमारी पोजिशन और मजबूत हुई है। अपने नजदीकी प्रतियोगी प्रभात खबर से दो लाख ज्यादा पाठक हमार पास हैं। झारखंड में कुल 11.6 लाख पाठक हिन्दुस्तान के हैं वहीं प्रभात खबर के लाख।ड्ढr दिल्ली और एनसीआर हमारे साथड्ढr इस पूर इलाके में हम अब नंबर दो की पोजीशन पर हैं। हिन्दुस्तान ने यहां अपने साथ 1 लाख 80 हाार पाठकों को जोड़ा। देश की राजधानी में भी हमारी रफ्तार अन्य के मुकाबले सबसे तेज है। यहां के 11 लाख पाठकों का विश्वास हमार साथ है।ड्ढr यूपी में भी तेजड्ढr पिछले दिनों हमने यूपी के तीन बड़े इलाकों-मेरठ, आगरा और कानपुर में दस्तक दी। इन तीनों क्षेत्रों में हमार साथ काबिलेगौर संख्या में पाठक जुड़े। कानपुर में तो हिन्दुस्तान पढ़ने वालों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। पूर उत्तर प्रदेश में हमार पाठकों की संख्या तकरीबन 22 लाख है। यहां दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या गिर रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो हिन्दुस्तान ने और किसी भी हिन्दी अखबार के मुकाबले कहीं तेजी और मजबूती से बढ़त हासिल की है।

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