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सॉरी, हम खरे नहीं उतरे

भारतीय महिला हॉकी टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। ओलंपिक क्वालिफाई करने में सफल नहीं हो सकी। इसके लिए टीम की सबसे सीनियर खिलाड़ी प्रीतम सिवाच ने देशवासियों से माफी मांगी है। यह बात कहते हुए उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि देश हमसे अच्छे प्रदर्शन की आस कर रहा था। देशवासियों को विश्वास था कि हम ऐसा कर सकते हैं। लेकिन, सॉरी, हमारी यहां बेस्ट टीम नहीं थी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ओलंपिक बड़ी बात है, हर खिलाड़ी का सपना होता है ओलंपिक। मैंने लम्बे समय तक अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेली है। मैं चाहती हूं कि ओलंपिक टैग के साथ हॉकी से विदा लूं। लेकिन भाग्य को यह मंजूर नहीं। मैं ही नहीं, पूरी टीम सदमे में है क्योंकि हम ऐसा नहीं कर सके।’ 33 वर्षीय सिवाच का प्रदर्शन इस ओलंपिक क्वालिफाइंग में कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने कहा, हमने इतना बुरा प्रदर्शन नहीं किया। हां, हमने मौके काफी गंवाए। 10 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी प्रीतम इस टूर्नामेंट में अमेरिकी कप्तान कैटी बार्बर के बाद दूसरी सबसे सीनियर खिलाड़ी हैं। लेकिन उम्र में प्रीतम कैटी से चार साल बड़ी हैं। दो बच्चों की मां प्रीतम ने कहा कि टीम इस टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी। ज्यादा से ज्यादा ट्रेनिंग और फोकस के साथ ही टीम ऊपर जा सकती है। मेर समय में अब मैं सबसे बड़ा फर्क मिडफील्ड का है। सीता गुसाईं के सेंटर में रहने से मिडफील्ड काफी मजबूत थी।

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