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एक चेहर पे नया चेहरा लगा लेते हैंच लोग

बसपा के श्रीभगवान बलिया के सिकन्दरपुर से चुनाव लड़ते हैं और चुनाव जीतने के बाद वे अपना नाम श्रीभगवान पाठक करा लेते हैं। इसी पार्टी के शाहजहाँपुर से विधायक रोशन लाल अब रोशन लाल वर्मा हो गए हैं तो शाहजहाँपुर के जलालाबाद से विधायक नीरज कुशवाहा अब नीरज (कुशवाहा) मौर्य बन गए हैं। महराजगंज से सपा विधायक श्रीपति अब श्रीपति आजाद लिखते हैं। झाँसी जिले से सपा विधायक दीप नारायण अब दीप नारायण सिंह (दीपक यादव) लिखते हैं। सताँव रायबरली के कांग्रसी विधायक शिव गणेश अब फिर से शिव गणेश ‘लोधी’ हो गए हैं। दल और निष्ठाएँ बदलने में माहिर नेता नाम बदलने में भी उस्ताद हैं। जन प्रतिनिधियों का यह ऐसा चेहरा है जिसकी जनता को भी जानकारी नहीं हो पाती है जो उन्हें चुनकर विधानसभा भेजती है।ड्ढr विधानसभा के अभिलेखों में अपना नाम संशोधित करालेना विधायकों का नया शगल बनता जा रहा है। कोई भी पार्टी अछूती नहीं है। सच कहिए तो एक होड़ सी मची है। नई विधानसभा में अब तक 60 विधायकों ने अपने नाम में संशोधन कराया है। नई पहचान बना ली है। इनमें सबसे अधिक 32 विधायक सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के हैं तो मुख्य विपक्षी दल सपा के 14 विधायकों ने नया चोला पहन लिया है। भाजपा के सात, कांग्रस के चार, रालोद के दो विधायकों के अलावा एक निर्दलीय ने भी नाम संशोधित कराए हैं। यह सिलसिला थम नहीं रहा। कई और कतार में हैं।ड्ढr

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