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गांवों का ‘सीन’ अब होगा कुछ डिफरंट

गांवों का ‘सीन’ अब कुछ डिफरंट होगा। रंगकर्मियों व कलाकारों की टोली पहुंचेगी गांवों में नुक्कड़ नाटक, कठपुतली डांस व लोकगीतों के साथ। गांववालों का होगा भरपूर मनोरंजन। लेकिन इनका मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं होगा। गीत-संगीत व कामेडी के साथ होगी ज्ञान की बातें। कलाकार नाटक,कठपुतली नृत्य व लोकगीतों की मदद से रोचक तरीके से बताएंगे कि भ्रूण हत्या पाप है। दहेज लेना व देना दोनों अपराध है। कच्ची उम्र में बच्चों की शादी करने पर सजा हो सकती है। महिलाओं पर घर के भीतर हिंसा की घटनाएं होने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है। महिलाओं के क्या-क्या अधिकार हैं। वे क्या-क्या कर सकती हैं। डायन प्रथा यानी अंधविश्वास से बचने की सलाह। अमूमन गांवों में रहने वाली अनपढ़ व कमजोर वर्ग की महिलाएं इन बातों से अनभिज्ञ रहती हैं।ड्ढr ड्ढr राज्य महिला विकास निगम ने नारी शक्ित योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को इन सामाजिक विषयों पर जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना तैयार किया है। मई में इस योजना को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू होगा। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान इस योजना पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के अधिकारियों के मुताबिक स्वैच्छिक संगठनों की मदद से राज्य के सभी 38 जिलों में सामाजिक जागरूकता का यह कार्यक्रम चलेगा। इसके लिए 12 स्वैच्छिक संगठनों का चयन किया गया है।ड्ढr निगम द्वारा इस बाबत प्रस्ताव मांगे गए थे जिसमें कुल 26 संस्थाओं ने शिरकत की। इनमें 12 का चयन कर इन्हें ‘इप्टा’ की मदद से हफ्तेभर का प्रशिक्षण रवीन्द्र भवन में दिया गया। अभी कुछ और संस्थाओं का भी चयन किया जाना है। फिलहाल 22 जिलों के 86 प्रखंडों में योजना को शुरू किया जाएगा। इन प्रखंडों में निगम की कई योजनाएं पहले से चल रही हैं। पहले से ही महिलाओं की स्वयं सहायता समूहें बनी हुई हैं।

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