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कांसे की लड़ाई भी हारी महिलाएं

बीजिंग ओलंपिक का टिकट पाने की उम्मीदें पर पहले ही धराशायी हो गई थीं। अब देखना यह था कि भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक क्वालिफायर से पदक लेकर आती है या फिर खाली हाथ लौटती है। भारतीय टीम का कांस्य पदक के लिए मुकाबला था नीदरलैंड एंटिलिस से। टीम 66 मिनट तक 1-0 से आगे थी लेकिन यहीं मैच ने पलटी खाई और भारत की कांस्य पदक जीतने की उम्मीद पर खत्म हो गई। पहले ही हाफ में राजविंदर कौर के पेनल्टी पर किए गए गोल से भारतीय टीम ने शुरुआती बढ़त बना ली थी। मैच खत्म होने में सिर्फ चार मिनट बचे थे और लगने लगा था कि भारत कम से कम कांस्य से जीत ही लेगा लेकिन यहीं एंटिलिस की एर्निस्टा श्रॉडर ने पेनल्टी पर गोल कर मैच को एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा दिया। तारीफ करनी होगी भारतीय गोलकीपर दीपिका मूर्ति की जिन्होंने एंटिलियंस के कई आक्रमण को बेकार किया लेकिन टीम के जीत के लिए इतना ही काफी नहीं था। एक्स्ट्रा टाइम के दूसर ही मिनट में मार्लिस वान डेर स्टेल ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदल कर यहां काफी संख्या में मौजूद भारतीय हॉकी प्रेमियों के उत्साह को शांत कर दिया। ममता खरब की टीम को मैच के दौरान आधा दर्जन पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन वह सिर्फ एक को ही गोल में बदलने में सफल हो सकी जबकि विपक्षी टीम को निर्धारित समय में मिला एकमात्र पेनल्टी कॉर्नर ही उन्हें मैच में वापसी करा गया। बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की उम्मीदें लेकर आई भारतीय टीम को पहले 45 मिनट में गोल करने के कई अवसर मिले लेकिन टीम उन्हें भुनाने में सफल नहीं हो सकी। इसके लिए सबसे ज्यादा दोषी हैं सबा अंजुम और सुरिंदर कौर। कोच एम.के. कौशिक ने अनुभवी डिफेंडर और टीम की उपकप्तान सुमन बाला और गगनदीप को रस्ट दिया। कोच की यह रणनीति काम आई। डिफेंडर राजविंदर ने न केवल तीसर पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया बल्कि उसने कई मौकों पर अच्छा बचाव भी किया। पेनल्टी कॉर्नर पर ली गई राजविंदर की हिट बुलेट की तरह थी। अपना 100वां मैच खेल रही भारतीय गोलकीपर दीपिका ने नेट में चीते जसी फुर्ती दिखाई और कई सुंदर बचाव किए।

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