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निर्बाध आपूर्ति कर

राज्य की चरमरायी बिजली व्यवस्था पर हाइकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सरकार को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि लोगों को परशानी से निजात मिल सके। एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एम कर्पग विनायगम और जस्टिस डीके सिन्हा की बेंच ने सरकार से पूछा कि आखिर बोर्ड का बंटवारा क्यों नहीं हो रहा है? इसमें कौन बाधक हैं? क्या कुछ लोगों के स्वार्थ के कारण विभाजन को टाला जा रहा है? सरकार और जेएसइबी को इस मामले में एक मई तक पूरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी में बिजली का संकट गहरा गया है। ऐसा संकट पहले नहीं हुआ था। लोग परशान हैं। पानी नहीं मिल रहा है और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। कारखाने जेनरटर के भरोसे चल रहे हैं। कोर्ट ने कई बार निर्देश दिये हैं, लेकिन बोर्ड और सरकार हमेशा कोई न कोई बहाना बना कर मामले को टालती है। जेएसइबी की ओर से बताया कि तकनीकी और मेकेनिकल गड़बड़ी के कारण यह समस्या है। बोर्ड के अधिकारी और कामगार इस समस्या को दूर करने के लिए दिन- रात काम कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में प्रार्थी एमएस मित्तल की ओर से बिजली की स्थिति में सुधार के लिए सुझाव भी दिये गये।

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