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पहले चरण में बहाल ज्यादा शिक्षक सरदर्द

पहले चरण में सरप्लस बहाल हो गए शिक्षक सरकार के लिए सिरदर्द बन गए हैं। मानव संसाधन विकास विभाग ने सभी जिलों के डीईओ, डीएसई और प्रखंडों में तैनात बीईओ से स्कूलों में जरूरत से अधिक तैनात शिक्षकों की नियोजन इकाईवार सूची मांगी है। इसके मद्देनजर नियोजन इकाइयां अपने-अपने क्षेत्र के हर स्कूल में छात्रों और शिक्षकों की संख्या का लेखा-जोखा तैयार करने में जुटी हैं।ड्ढr ड्ढr विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक संभव है बहाली के वक्त छात्रों की संख्या के अनुपात में तय मानक के तहत ही शिक्षकों की नियुक्ित हुई हो, लेकिन बाद में किसी वजह से छात्र घटने पर अब यह अनुपात गड़बड़ा रहा है। लिहाजा निर्णय लिया गया है कि जिन स्कूलों में अधिक शिक्षक हैं, उनका समायोजन उन स्कूलों में किया जाए जहां जरूरत से कम शिक्षक हैं। पहले चरण की बहाली के लिए नियमावली में स्पष्ट नियम नहीं होने से भी कई स्कूलों में आरक्षण रोस्टर पालन करने के चक्कर में विषयवार अधिक शिक्षक नियुक्त हो गए थे। इसके मद्देनजर अब उनको दूसर स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है। सरप्लस शिक्षकों का समायोजन इसलिए भी जरूरी है कि नियोजन इकाईवार शिक्षकों की संख्या के आधार पर ही सरकार दूसर चरण की बहाली के लिए पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करगी। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनाराज्यों को मिले मंजूरी का अधिकारड्ढr पटना (हि. ब्यू.)। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की योजनाओं को स्वीकृत करने का एकाधिकार केन्द्र के पास होना योजनाओं की प्रगति में बड़ी बाधा है। अधिकारी खुले तौर पर यह बात कहें न कहें हैदराबाद में मिशन निदेशकों के लिए आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में जो प्रस्ताव पास हुए उसका लब्बोलुआब यही है। सभी राज्यों के मिशन निदेशकोंे ने एकमत से योजनाओं को गति देने के लिए कुछ सुझाव केन्द्र के पास भेजे हैं। राज्य में बागवानी मिशन के निदेशक सनद कुमार जयपुरियार ने बताया कि प्रस्ताव के माध्यम से केन्द्र से यह आग्रह किया गया है कि 25 लाख तक की योजनाओं को स्वीकृत करने का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। बिहार सरकार योजनाओं को गति देने का हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। इससे आवेदकों को योजना पारित कराने के लिए 13 स्थान पर न जाकर मात्र एक जगह फार्म जमा करना होता है ।ड्ढr ड्ढr वहीं से सारी प्रक्रिया पूरी कर आवेदन को केन्द्र के पास भेज दिया जाता है। अगर 25 लाख तक की योजनाओं को स्वीकृत करने का अधिकार राज्यों को मिल जाये तो एक सप्ताह में ये योजनाएं स्वीकृत हो जाएंगी। क्षेत्र सलाहकारों का मानदेय छह हाार से बढ़ाकर आठ हाार करने और उन्हें यात्रा भत्ता देने का सुझाव भी मिशन निदेशकों ने दिया है। योजनाओं को गति देने के लिए मिशन डायरक्टर और जिला उद्यान पदाधिकारियों को वित्तीय शक्ति देने पर भी बल दिया गया है। वर्तमान में छोटी- छोटी राशि के लिए भी मिशन अधिकारियों को जिलाधिकारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। अन्य महत्वपूर्ण सुझावों में प्रसार संबंधी योजनाओं को एक साथ जोड़ना, खाद्य सुरक्षा मिशन की तरह विज्ञापन मद का सृजन करना और कोल्ड स्टोरा तथा पैक हाउस के लिए अनुदान को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना शमिल है। इसके अलावा 50 हाार तक की योजना को क्रेडिट लिंक्ड नहीं करने की सलाह भी दी गई है।

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