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सड़क बनने से संवरने लगी गांवों की किस्मत

हीं तकनीकी शिक्षण संस्थान खुल रहे हैं तो कई जगह दुकान खोलने की तैयारी चल रही है। कोई व्यवसाय के लिए तो बहुत लोग आवास के लिए जमीन तलाश रहे हैं। गिड़गिड़ाने पर भी जिस भूमि की कीमत लोग पचास हाार रुपए प्रति कट्ठा देने से कतराते थे, आज उसी जमीन के लिए दो-ढ़ाई लाख देने वाले आराू मिन्नत कर रहे हैं। यह सब बदलाव महा दो-तीन माह के भीतर आया है। इसके लिए लोग महा एक सड़क को सूत्रधार मान रहे हैं। जो लोग खुद को पिछड़े गांवों का निवासी समझ हीन भावना से ग्रस्त रहते थे आज वे फूले नहीं समा रहे। हाारों आंखों में विकास के सुनहले सपने सजने लगे हैं।ड्ढr ड्ढr सपनों की मानिंद पलक झपकते ही कई गांवों के लोगों की किस्मत संवरने लगी है। गुप्ता लखमिनियां बांध की जर्जर ईंट सोलिंग सड़क का देखते ही देखते कायाकल्प होने लगा है। कल तक ‘डोंर जोन’ समझे जाने वाले क्षेत्र में विकास के नए आयाम को परिभाषित होने लगे हैं। पहले जिस इलाके में लोगों को दिन में भी जाने में डर लगता था आज वहां रात में भी आवाजाही लगी रहती है। वह भी तब जबकि सड़क निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। रमजानपुर के समीप वाजितपुर ढ़ाला से मटिहानी, बेगूसराय व बरौनी प्रखंड के कई गांवों से होते हुए बरौनी थर्मल के निकट एनएच 31 को जोड़ने वाली यह सड़क कई मामलों में वरदान साबित होगी। बेगूसराय होकर गुजरने वाले एन.एच. पर वाहनों का लोड घटेगा ही वाहन संचालकों को भी सहूलियत होगी। ज्यादा फायदा तो इस नई सड़क के आसपास के गांवों के लोगों को महसूस हो रहा है। इनका मानना है कि इस सड़क के बनने से इलाके में विकास के नए युग का सूत्रपात होगा। कई गांवों को मुख्य सड़क से निकटता का गौरव भी हासिल होगा। अमित रौशन बताते हैं कि पहले रामदीरी व सिंहमा की छवि व वहां का माहौल अच्छा नहीं था लेकिन अब लोगों की मानसिकता बदल गयी है। राज किशोर सिंह बताते हैं कि एन.एच. का बाईपास बनने के बाद लिंक सड़कें भी बनेंगी, पेट्रोल पंप खुलेंगे ।

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