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प्रकृति ने मानव सभ्यता को दी दस साल की राहत

लोबल वार्मिग से परशान हमारी दुनिया अब तक इसका हल खोजने में नाकाम रही है और बढ़ते तापमान ने पूरी दुनिया को सांसत में डाले रखी है। पर अब मानव की मजबूरियां देख प्रकृति मेहरबान हो रही है। 2010 से अगले दस साल तक विश्व के तापमान में बढ़ोत्तरी नहीं होगी- ग्रीन हाउस गैसों का प्रभाव बेअसर होगा और लोग राहत की सांस ले सकेंगे। लेकिन प्रकृति की यह मेहरबानी केवल दस वर्षो के लिए है जो मेहरबानी से ज्यादा एक त्रासद भविष्य की चेतावनी लगती है।ड्ढr ड्ढr गर्मी से बेचैन दुनिया को राहत देने वाला यह समाचार प्रकाशित हुआ है अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान पत्रिका नेचर में। यह समाचार जर्मनी के लेबनिज इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन साइंसेज और मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ मीटिरियोलॉजी के वैज्ञानिकों की टीम के डा. कीनलीसाइड के नेतृत्व में किये गये शोध पर आधारित है। इन वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान के निष्कर्ष में बताया है कि अगला दशक 2010-2020 एक एसी अवधि होगी जिसमें प्राकृतिक घटनाएं ग्रीन हाउस गैस के बढ़ते प्रभाव को बेअसर करंगी और मौसम की भविष्यवाणियों के विपरीत विश्व का तापमान वर्तमान स्तर तक रहेगा या उससे थोड़ा कम भी हो सकता है। पर यह बढ़ती गर्मी में मौसम की भविष्यवाणी जटिल गणितीय गणनाओं के आधार पर की जाती है। जिनमें कई भौतिक परिघटनाओं के आंकड़े शामिल किये जाते हैं।ड्ढr ड्ढr जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों पर आधारित कंप्यूटर से जो जलवायु माडल विकसित किया है उसमें तापमान में कमी के संकेत मिलते हैं। अब तक ग्लोबल वार्मिग और उसके प्रभाव को लेकर दो खेमों में बंटे वैज्ञानिक भी इस जलवायु माडल से सहमत हैं। इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने समुद्र के सतहों के तापमान की जांच की जो विश्व का औसत तापमान निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।ं

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  • Web Title: प्रकृति ने मानव सभ्यता को दी दस साल की राहत