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गर्मी कुछ ऐसी कि कम पड़ गए सवा लाख पंखे

गर्मी इस बार कुछ ऐसी पड़ी कि शहर में हाथ वाले पंखों की कमी पड़ गई। यहां ताड़ के सवा लाख पंखों की खपत आम तौर पर गर्मी में हो जाती है। स्थानीय व्यापारी इसी हिसाब से पंखे मंगाते हैं। पर इस बार की गर्मी का नतीजा है कि गया और मुजफ्फरपुर से आए पंखे की शार्टेा हो गई है। दलदली बाजार, मौना चौक, साहेबगंज समेत अन्य बाजारों के व्यवसायी पंखे का कारोबार करते हैं। होली के पहले से यह कारोबार शुरु हो जाता है। उक्त शहरों से मंगाए जाने वाले पंखे कच्चे होते हैं।ड्ढr ड्ढr स्थानीय स्तर पर उन्हें आकर्षक रंग दिया जाता है। धूप में सुखाया जाता है। व्यवसायी राजू बताते हैं कि इस काम में घर की महिलाएं सहयोग करती हैं। विश्वकर्मा बताते हैं कि मुजफ्फरपुर के पंखे बेहतर क्वालिटी के होते हैं। इनकी कीमत ज्यादा होती है। फिलवक्त शहर में 4- 6 रुपए प्रति पंखे की बिक्री हो रही है। खुदरा दुकानदार और घुमाकर बेचने वाले विक्रेता शहर से लेकर गांवों तक बिक्री करते हैं। इस बार ज्यादा पंखे नहीं आए। दरअसल इसके लिए पहले से एडवांस देना होता है। तब सप्लाई होती है। पिछली बार करीब डेढ़ लाख पंखे आए थे। कुछ बच गए। इसलिए इस बार आर्डर कम हुआ किंतु प्रचंड गर्मी की वजह से मांग बढ़ गई। अब नया आर्डर भी बनाने वाले नहीं ले रहे हैं। इसलिए पंखों की आवक लगभग बंद- सी है। मालूम हो कि पंखे का कारोबार अगस्त तक चलता है किन्तु मध्य गर्मी में ही ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक पखवार पूर्व तक शहर की लगभग हर सड़क अथवा सार्वजनिक स्थान पर पंखे बेचने वाले दिख रहे थे किन्तु अब वे कभी-कभार दिख रहे हैं।

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