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बेटे नहीं, अपराधी

‘करोड़ों की मालकिन रोटी-कपड़े को तरसी’ पढ़ा। बहुत कष्ट हुआ। संभवत: इसलिए कि मैं भी बूढ़ा हूं। अपने आपको इस वृद्धावस्था के स्थान पर रख कर देखता हूं। समाचार ये भी है कि पुलिस ने वृद्धा की एक न सुनी। बेटों ने वृद्धा के साथ मारपीट की। आखिरकार वह कड़कडड़ूमा की विशेष अदालत में अर्जी लगाने पहुंची। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिए वृद्धा की सुरक्षा आदि के लिए। लेकिन मैं अपने अनुभव से इसके इस मामले के अंत के बार में आपको बतला दूं। अब वकील व पुलिस मिल कर बुढ़िया से समझौता कर लेने को कहेंगे। जायदाद बच्चों के नाम करवा देंगे। बुढ़िया की आजीवन आवास और भोजन का आश्वासन या एक दिन बुढ़िया कहीं मरी मिलेगी। ये बेटे नहीं विशुद्ध अपराधी हैं इन पर अपराधियों की तरह ही मामला दर्ज किया जाना चाहिए।ड्ढr यू. सी. पांडे, द्वारका, नई दिल्ली कब बदलेंगे हम मद्रास हुआ चेन्नई, कलकत्ता हुआ कोलकाता, बंबई हुआ मुंबई। देश कब केवल भारत होगा, और हम कब भारतीय।ड्ढr अविनाश कुमार, गोबरशाही, मुजफ्फरपुर जहां सधे मतलब शिव सेना ने चीयर्स गर्ल्स के खिलाफ जो आवाज उठाई है उसकी मैं तारीफ करता हूं। लेकिन वही शिव सेना महाराष्ट्र में बिहार के लोगों का विरोध करती है। क्या उनका देशी-विदेशी से कोई लेना-देना नहीं। वे वहीं बुराई देखते हैं, जहां उनका मतलब सधता है।ड्ढr अनुपम चौहान, पटना जागो उपभोक्ता जागो महंगाई के खिलाफ केन्द्र सरकार भले ही कितने दांव खेले, सभी दांव तब तक विफल होंगे, जब तक जागरूक उपभोक्ता का समर्थन उसे प्राप्त नहीं होगा, जमाखोरों एवं कृत्रिम अभाव पैदा करने वालों को जब तक बेखौफ छोड़ा जाएगा, तब तक आम आदमी महंगाई की मार से नहीं बचेगा।ड्ढr डॉ. सुधाकर आशावादी,ब्रह्मपुरी, मेरठ ऑटो रिक्शा वालों पर रहे नजर शहर में यातायात समस्या को दुरुस्त करने के लिए चंडीगढ़ पुलिस समय-समय पर अभियान चलाती है, पर ऑटो रिक्शा वालों की दादागिरी सरआम देखी जा सकती है। अनजान आदमी से ऑटो रिक्शा वाले अमूमन दोगुनी कीमत वसूलते हैं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए इन पर नजर रखी जाए।ड्ढr राम सहाय, बापूधाम कॉलोनी, चंडीगढ़ सूचना-अधिकार का दायरा न्यायपालिका को सूचना के अधिकार के दायरे में आना ही चाहिए। क्योंकि आज संविधान का कोई ऐसा पद नहीं है, जो आरटीआई एक्ट के तहत नहीं आता हो। आज प्रधानमंत्री से लेकर लोकसभा के अध्यक्ष के पद तक यह कानून लागू होता है। न्यायपालिका में भी आज भ्रष्टाचार रूपी वृक्ष की शाखाएं लगातार बढ़ती ही जा रहीं है। भारत जैसे गणराज्य में जनता के प्रति उनकी जबाबदेही निश्चित रूप से बनती है।ड्ढr जितेन्द्र जोशी सुरक्षा हथियार देकर नहीं हथियार रखना आजकल फैशन सा बनता जा रहा है। युवा वर्ग तो इसे स्टे्टस सिंबल मानने लगा है। सरकार को चाहिए कि वह कानून व्यवस्था ठीक करके सभी लोगों को सुरक्षा दे। सुरक्षा के नाम पर लोगों को हथियार देना बंद कर।ड्ढr मोहम्मद अनस, झांसी, इलाहाबाद

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