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थोरियम से बिजली बनाने में मिली सफलता

भारत ने थोरियम से बिजली बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना का एक जरूरी पहला चरण पूरा कर लिया है। यह है थोरियम आधारित रिसर्च प्लेटफार्म पर बिजली बनाने वाली नाभिकीय क्रिया कर दिखाना। बहुत कम क्षमता की इस नन्हीं सी सुविधा का मकसद है 300 मेगावाट के पहले थोरियम रिएक्टर के डिााइन संबंधी पैरामीटर तय करना। सूत्रों के अनुसार पिछले महीने क्रिटिकल हुए इस रिसर्च प्लेटफार्म में भविष्य के थोरियम रिएक्टर की परिस्थितियों को लघु स्तर पर पैदा किया जा सकेगा। इससे थोरियम रिएक्टर के कोर संबंधी रिसर्च को ठोस धरातल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कोर में ही परमाणु ईंधन रखा जाता है और नाभिकीय क्रिया होती है। भारत का परमाणु बिजली कार्यक्रम तीन चरण वाला है। पहले चरण में यूरनियम से बिजली बनाई जा रही है। लेकिन अमेरिका से एटमी करार का राजनीतिक कारणों से चल रहे विरोध की वजह से इस बात की संभावना नहीं कि भारत अपने यूरनियम से दस हाार मेगावाट से अधिक परमाणु बिजली बना सकेगा। भारत के परमाणु वैज्ञानिकों में इसलिए तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने की बेचैनी है। दूसर चरण का काम जारी है और भारत पहला प्रोटोटाइप 500 मेगावाट का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बना रहा है। इसमें पहले चरण से मिले ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा और पहले से अधिक ईंधन हासिल होगा। भारत के लिए दूसर चरण के बाद तीसरा चरण सबसे अहम है। इसमें थोरियम का इस्तेमाल किया जा सकेगा। भारत में परमाणु ईंधन के नाम पर थोरियम ही प्रचुरता से मौजूद है। तीसर चरण की खासियत यह कि इससे पहले चरण के लिए यूरनियम मिल सकेगा। इसका अर्थ है कि पूरा चक्र एक दूसर पर निर्भर होगा। लेकिन इस मामले में भारत को पूरी सफलता हासिल करने में तीन दशक लग जाएंगे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि हमें थोरियम के इस्तेमाल के तीसर चरण तक जल्दी पहुंचना है, तो भारत को अमेरिका से एटमी करार करना चाहिए।

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