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एजी-सीएजी की चिट्ठी पर सरकार रस

राज्य सरकार एजी और सीएजी की रिपोटरें पर गंभीर हुई है। गड़बड़ियां उाागर करनेवाली जो रिपोर्ट फाइलों में धूल फांकती थी, वह अब रंग दिखाने लगी है। एसी बिल के तहत विवादास्पद ढंग से निकाले गये 5800 करोड़ के अग्रिम के मामले में 88 इंजीनियरों पर कार्रवाई एसी ही रिपोर्ट के आधार पर हुई। अब कई और इसके लपेटे में आयेंगे। चिह्न्ति अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय पर खर्चो का हिसाब नहीं देनेवाले अधिकारियों के लिए दो दर्जन विभागीय प्रधान और विभागाध्यक्षों पर भी जवाबदेही तय की जा रही है। वित्त विभाग ने एक सप्ताह में दो दर्जन निर्देश जारी किये हैं। इससे पहले सीएजी की रिपोटोर्ं में अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही थी। ऑडिट आपत्तियों पर कार्रवाई नहीं होने पर सीएजी ने चिंता भी जतायी थी। मुख्य सचिव को तीन बार इस बार में दिशा-निर्देश दिया गया था। दो बार सीएजी ने मुख्यमंत्री को भी डीओ लेटर लिखा था। अब शासन-प्रशासन में शीर्ष पर बैठे लोग अपनी गर्दन फंसते देख रस हो गये हैं। विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश होने के बाद पीएसी ने भी कारगर कार्रवाई नहीं की। भवन निर्माण, कल्याण, पथ, वन एवं पर्यावरण, ऊर्जा, ग्रामीण विकास विभाग में बगैर काम के भुगतान, बैंकों में पैसा रखने से लेकर,अग्रिम के नाम पर राशि निकाल कर रख लेने के मामले को एजी और सीएजी ने उाागर किया था। लोक लेखा समिति के सभापति पीएन सिंह ने कहा था कि सीएस बुलाने पर मीटिंग में नहीं आते हैं। वर्ष 1से कैग रिपोर्ट की 0 फीसदी आपत्ति लंबित है। ं

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