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दाम घटाएगा इस्पात उद्योग

देश की बड़ी स्टील निर्माता कंपनियाँ अपने उत्पादों के दाम प्रति टन चार हजार रुपए तक कम करने को राजी हो गई हैं। बढ़ती महँगाई पर काबू पाने की कोशिश में जुटी केन्द्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्टील निर्यात पर शुल्क नहीं लगाने की उनकी माँग पर विचार किया जाएगा।ड्ढr दाम कम करने वाली कंपनियों में सेल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, इस्पात, एस्सार और आरआईएनएल शामिल हैं। दामों में यह कटौती अगले तीन महीनों तक बरकरार रहेगी। स्टील कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बुधवार को यहाँ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। इस्पात इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक विनोद मित्तल ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने कहा है कि स्टील पर निर्यात शुल्क लगाने का फैसला स्थगित रखा जाएगा।ड्ढr पिछले हफ्ते संसद में वित्त विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने स्टील पर 15 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। हालाँकि निर्यात शुल्क की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। वित्त मंत्री की घोषणा का मकसद स्टील की घरलू आपूर्ति में बढ़ोतरी करना था, ताकि इसकी कीमतों पर लगाम लग सके। वित्त मंत्री का मानना है कि बेकाबू मुद्रास्फीति के लिए मुख्य रूप से स्टील उद्योग जिम्मेदार है। मुद्रास्फीति सात फीसदी के ऊपर चल रही है और इसकी 21 प्रतिशत जिम्मेदारी स्टील उद्योग पर है।ड्ढr भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के अध्यक्ष सुशील कुमार रूँगटा ने कहा, ‘हम सरकार की इस चिन्ता से सहमत हैं कि मुद्रास्फीति में स्टील के दामों का योगदान है।’ पिछले एक वर्ष में इस्पात के मूल्यों में 4ीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि बड़े निर्माताओं ने फ्लैट स्टील उत्पादों के दाम में चार हजार रुपए प्रति टन की कटौती करने का फैसला किया है। रिबार और स्ट्रक्चरल स्टील की कीमतों में दो हजार रुपए प्रति टन की कटौती की जाएगी। वे सभी स्टील निर्माता फ्लैट स्टील के दाम कम करंगे, जिन्होंने पिछले महीने दाम बढ़ाए थे। हालाँकि रिबार और स्ट्रक्चरल स्टील के दाम पिछले अथवा इस महीने नहीं बढ़ाए गए, इसके बावजूद इसमें कमी लाई जाएगी। कीमतों में यह कटौती निर्यात के मामले में नहीं लागू होगी।ड्ढr इस्पात उद्योग के प्रतिनिधमंडल ने प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें अपनी समस्याओं की जानकारी दी। बैठक में चिदम्बरम, इस्पात मंत्री रामविलास पासवान और कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर भी मौजूद थे।ड्ढr

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