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बिहार में विज्ञान क्रांति की जरूरत

बिहार में विज्ञान क्रांति की जरूरत है। इसके लिए छात्रों के बीच विज्ञान विषय की जटिलताओं को दूर कर सरल रूप में इसे पेश किए जाने की जरूरत है। पटना साइंस कॉलेज में आयोजित प्रथम बिहार साइंस कांफ्रेंस में आए विद्वानों ने कुछ इसी प्रकार के विचार व्यक्त किए।ड्ढr ड्ढr आईआईटी मुंबई में रसायनशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. एमके मिश्रा ने कहा कि बिहार में बड़ी संभावनाएं हैं। बस मानसिक रुकावटों को दूर कर इस मार्ग को खोलने की जरूरत है। यहां के लोगों में ज्ञान कूट-कूट कर भरा हुआ है। छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन के लिए अच्छी संस्थाओं का पुनरुद्धार जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार विज्ञान के मामले में काफी पीछे है। ऑक्सफोर्ड विवि, इंगलैंड के बायो-इंफारमेटिक्स के आशीष कुमार ने कहा कि भारत के ब्रेन पावर की हमेशा चर्चा होती है लेकिन बिहार व झारखंड के बार में ऐसी चर्चाएं नहीं होती। बिहार की प्रतिभाएं आपको विश्व में कहीं भी मिल जाएंगी लेकिन वे अपने को संकुचित कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान का फलक इतना बढ़ गया है कि केवल भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान व गणित से उसका विकास संभव नहीं है।पटना विवि के भौतिकी विभाग के डा. राजमणि प्रसाद ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रहे रिसर्च कार्यो के संबंध में जानकारी प्राप्त करना है। हमारा प्रयास है कि विज्ञान में जिस प्रकार के कार्य चल रहे हैं उसको यहां पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास हो। मगध महिला कॉलेज की बीसीए समन्वयक डा. डॉली सिन्हा ने कहा कि पटना विवि के साथ-साथ बिहार में विज्ञान में शोध का स्तर ठीक नहीं है। साइंस में स्नातक करने के बाद छात्र-छात्राओं को आसानी से नौकरी मिल जाती है। साथ ही विज्ञान आज जिन ऊंचाइयों को छू रहा है उस प्रकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर बिहार के किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्रों में शोध की भावना जागेगी और निश्चित रूप से विज्ञान का विकास होगा। जीवन व रसायन विज्ञान को साथ रखकर चलेंड्ढr पटना (हि.प्र.)। फोटोनिक्स रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने का कार्य करता है। तकनीकी सत्र में फोटो डायनामिक्स कंट्रोल विषय पर आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए आईआईटी मुंबई के प्रो. एमके मिश्रा ने कहा कि जीवन विज्ञान व रसायन विज्ञान को साथ रखकर चलने की जरूरत है। रासायनिक प्रतिक्रियाओं के संबंध में उन्होंने विस्तृत विचार व्यक्त किए। लीड्स विवि, इंगलैंड के मैटेरियल साइंस विभाग के प्रो. अनिमेष झा ने फोटोनिक्स विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकी, चिकित्सा विज्ञान व जीव विज्ञान को साथ लाकर ही तरक्की की जा सकती है। अगर आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा तो आप बेहतर काम नहीं कर सकते। कार्यक्रम का समापन ऑक्सफोर्ड विवि के डा. आशीष कुमार द्वारा प्रस्तुत बायो-इंफारमेटिक्स पर लेक्चर से हुआ। इसमें डा. कुमार ने कहा कि जीन व डीनए टेस्ट की महत्ता बढ़ गयी है। इनका इस्तेमाल दवाओं के निर्माण में हो रहा है। बस इस तरफ विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसमें प्रो. राजमणि प्रसाद, प्रो. धर्मप्रकाश, डा. जनेंद्र कुमार आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।ं

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