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रामदॉस इस्तीफा दें अन्यथा पीएम बर्खास्त करें

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि एम्स पर उच्चतम न्यायालय के बुधवार के फैसले के मद्देनजर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अम्बुमणि रामदॉस को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए अन्यथा प्रधानमंत्री को चाहिए कि उन्हे बर्खास्त करें। स्वराज ने संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. वेणुगोपाल के मामले में उच्चतम न्यायालय के गुरुवार के फैसले से यह बात साबित हुई कि रामदॉस डॉ. वेणुगोपाल के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से ग्रसित हो कर और मनमाने तरीके से काम किया। उन्होंने कहा कि रामदॉस ने इस संबंध में कानून में संशोधन पारित कराने में संसद का दुरुपयोग किया है। स्वराज ने कहा कि कोर्ट के फैसले से डॉ. रामदॉस के साथ केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की भी हार हुई है और अब न्यायालय के फैसले के बाद स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर वे इस्तीफा नही देते है तो प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चाहिए कि वह उन्हे तत्काल बर्खास्त करें। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इससे न्यायपालिका और विधायिका में किसी तरह से टकराव पैदा नही होगा क्योंकि न्यायालय ने संसद द्वारा पारित संशोधन के बारे में कोई आपत्ति नहीं की है, बल्कि कानून में संशोधन कराने के पीछे बदनीयती की भावना पर आपत्ति की है। स्वराज ने कहा कि न्यायालय को यह अधिकार है कि दुर्भावना अथवा अन्य किसी व्यक्ितगत कारण से किसी कानून में संशोधन किया गया हो तो वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. रामदॉस ने डॉ. वेणूगोपाल के खिलाफ दुर्भावना और मनमाने तरीके से कानून में संशोधन करा कर एम्स के निदेशक की आयु सीमा 65 वर्ष तक तय की। इधर जनता दल यूनाइटेड ने भी उच्चतम न्यायालय के फैसले को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के लिए धक्का बताया है और कहा है कि इससे सरकार की किरकिरी हुई है। पार्टी के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने कहा कि ऐसा जान पड़ता है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रामदॉस ने डॉ. वेणुगोपाल से निजी टकराव मोल ले रखा था और उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उन्होंने कहा कि डॉ. वेणुगोपाल की आरक्षण विरोधी गतिवधियों को देखते हुए उनके खिलाफ जांच बिठानी चाहिए थी और तब उन्हें हटाया जाना चाहिए था। तिवारी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में कोई समन्वय नहीं है और हर मंत्री अपनी अलग सत्ता बनाए हुए हैं तथा प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की कोई चलती नहीं है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार में अब विखराव दिखने लगा है और वह चारों तरफ से घिरती जा रही है। सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दलों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संतुष्टि व्यक्त की है और इस फैसले को बिल्कुल सही बताया है।

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