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राजरंग

बाबा की बात ही निराली है। बात- बात पर दहाड़ते हैं। बिहार में मच्छरों पर उनकी गर्जन की गूंज आज भी गूंजती है। अपनी बिरादरी में भी बाबा की पूछ है। झारखंड में उनकी बिरादरी का एक जलसा हुआ। सो, बाबा को बुलाया गया। वे आये भी। अपनी आदत के अनुसार सम्मेलन में वह बिरादरी पर कम-सरकार पर ज्यादा बोले। मधु बाबू पर बाबा ने कोड़ा भी चलाया और उनकी बैसाखी खींचने की अपील भी कर डाली। जलसा में दाढ़ी वाले इस बाबा की जय-ायकार भी जम कर हुई। महंगाई को लेकर बाबा का प्रवचन सभी को भाया। सुबह भी उनकी काफी तारीफ हो रही थी। बिरादरी वाले कह रहे थे चौबे जी बन ही गये न छब्बे। लेकिन चौबे जी को छब्बे बनना सुहाया नहीं। सो उन्होंने यदु के नाथ बाबा को बुलाया। फिर चल पड़े मधु बाबू के द्वार। वहां प्रणाम- पाती हुआ। मधु बाबू की जमकर तारीफ कर डाली। कह डाला, आप तो अच्छे हैं, लेकिन आपका चेला लोग गड़बड़ कर रहा है। मीठा- पानी के बाद बाबा बाहर आये। लेकिन उनकी बिरादरी के लोग कह रहे हैं-चौबे जी तो दुबे बन गये।

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